AAP ने मांगा पूरा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, BJP ने उठाए ‘रेट कार्ड’ से ट्रांसफर-पोस्टिंग के सवाल
चंडीगढ़। पंजाब में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के दावों को लेकर पंजाब पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। पंजाब पुलिस ने मामले से संबंधित पूरी फाइल और दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए ED को दूसरी बार रिमाइंडर भेजा है।
जानकारी के अनुसार, पंजाब पुलिस ने पहले ED के एक अधिकारी को 1 सितंबर सुबह 11 बजे पंजाब पुलिस मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा था, लेकिन कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने दूसरा रिमाइंडर भेजते हुए ED अधिकारी को 3 सितंबर दोपहर 3 बजे पंजाब पुलिस मुख्यालय पहुंचने के लिए कहा है।
इस पूरे मामले को लेकर पंजाब की राजनीति भी गर्मा गई है। एक तरफ आम आदमी पार्टी ने ED की ओर से पेश किए गए कथित सबूतों पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा ने पंजाब सरकार पर ट्रांसफर-पोस्टिंग में कथित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
अमन अरोड़ा बोले—दस्तावेज पढ़ने लायक नहीं
AAP के पंजाब प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ED के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एजेंसी जिन चैट, स्क्रीनशॉट और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के आधार पर आरोप लगा रही है, वे स्पष्ट नहीं हैं और कई दस्तावेज पढ़ने योग्य तक नहीं हैं।
अरोड़ा ने मांग की कि ED अपने दावों से संबंधित दस्तावेजों की पूरी और स्पष्ट कॉपी उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि केवल स्क्रीनशॉट के आधार पर आरोप लगाने के बजाय पूरा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि यह स्पष्ट किया जाए कि किसने किसे मैसेज भेजा, मैसेज कब भेजा गया और उसका स्रोत क्या था।
तीसरी चिट्ठी के बाद दस्तावेजों पर उठाए सवाल
अमन अरोड़ा के अनुसार, ED ने पंजाब पुलिस को तीसरी चिट्ठी लिखकर इस मामले में FIR दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस ने 28 अगस्त को मामले से जुड़े दस्तावेज और सबूत मांगे थे और ED अधिकारी को 1 सितंबर को पेश होने के लिए कहा था।
अरोड़ा ने दावा किया कि अभी तक ED का कोई अधिकारी पंजाब पुलिस मुख्यालय में पेश नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस को केवल चैट के स्क्रीनशॉट नहीं, बल्कि पूरा मूल इलेक्ट्रॉनिक डेटा दिया जाना चाहिए, ताकि संदेश भेजने वाले व्यक्ति, समय और स्रोत की स्वतंत्र रूप से जांच की जा सके।
तलाशी, जब्ती और गवाहों के बयान भी देने की मांग
AAP मंत्री ने मांग की कि ED तलाशी और जब्ती से संबंधित रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और जांच के दौरान सामने आई अन्य सामग्री भी पंजाब पुलिस के साथ साझा करे।
उन्होंने कहा कि जांच में केवल आरोपों के समर्थन में मौजूद सामग्री ही नहीं, बल्कि आरोपों के विपरीत जाने वाली सामग्री भी संबंधित जांच एजेंसी को उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
अमन अरोड़ा का आरोप—केंद्र के इशारे पर काम कर रही ED
अमन अरोड़ा ने केंद्र सरकार और भाजपा पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा का उद्देश्य पंजाब में राजनीतिक माहौल खराब करना, AAP की वरिष्ठ नेतृत्व को मामलों में उलझाना और अधिकारियों पर दबाव बनाना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ED केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रही है। अरोड़ा ने कहा कि पंजाब के अधिकारी ED द्वारा बुलाए जाने पर जांच में सहयोग करते हैं, लेकिन पंजाब पुलिस द्वारा तथ्य और दस्तावेज मांगे जाने पर एजेंसी की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा।
उन्होंने दावा किया कि ED के पास ठोस सबूत नहीं हैं और मीडिया के माध्यम से नेताओं के नाम उछालकर AAP नेतृत्व को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
एल्टस प्रोजेक्ट की पूरी टाइमलाइन की जांच की मांग
अमन अरोड़ा ने करीब 230 एकड़ के एल्टस प्रोजेक्ट को लेकर ED के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट की प्रक्रिया वर्ष 2011-12 में शुरू हुई थी और इसके बाद अकाली दल-भाजपा, कांग्रेस और AAP की सरकारें सत्ता में रहीं।
उन्होंने दावा किया कि AAP सरकार के कार्यकाल में केवल एक CLU हुआ था और संबंधित FIR को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट रद्द कर चुका है।
अरोड़ा ने कहा कि यदि CLU और लेआउट प्लान में कथित गड़बड़ियों की जांच की जानी है तो 2012 से अब तक इस प्रक्रिया से जुड़े सभी जिम्मेदार लोगों से पूछताछ की जानी चाहिए।
उन्होंने सुखबीर बादल और कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत विभिन्न नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि किसी एक सरकार या नेता को निशाना बनाने के बजाय पूरे मामले और पूरी अवधि की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
गौरव भाटिया बोले—पंजाब में ‘रेट कार्ड’ से हो रही ट्रांसफर-पोस्टिंग
वहीं, भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में ट्रांसफर और पोस्टिंग कथित तौर पर एक ‘रेट कार्ड’ के आधार पर की जा रही है।
भाटिया ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन का नाम लेते हुए कहा कि ED की जांच में विभिन्न पदों और विभागों में ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए कथित तौर पर अलग-अलग दरें तय होने की बात सामने आई है।
उन्होंने इसे कथित ‘कैश फॉर ट्रांसफर’ मामला बताते हुए पंजाब सरकार से जवाब मांगा।
किस विभाग में पोस्टिंग की कितनी कीमत, BJP ने उठाए सवाल
भाटिया ने आरोप लगाया कि कथित रेट कार्ड में अलग-अलग पदों और विभागों में पोस्टिंग के लिए रकम तय होने की बात सामने आई है। उन्होंने सवाल उठाया कि पंजाब सरकार में ट्रांसफर-पोस्टिंग की प्रक्रिया किस आधार पर चल रही थी।
भाजपा प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस मामले पर जवाब मांगा। उन्होंने यह भी सवाल किया कि कथित मामले का मुख्य सूत्रधार कौन है और क्या इसमें AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की कोई भूमिका है।
भाटिया ने कहा कि पंजाब सरकार को इन आरोपों पर जनता के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।
ED ने पंजाब DGP को भेजे थे तीन पत्र
मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी 27 अगस्त को सुनवाई हुई थी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत में दी गई जानकारी के अनुसार, ED ने पंजाब के DGP को इस मामले में तीन पत्र भेजे थे।
जानकारी के अनुसार, पहला पत्र 24 जुलाई, दूसरा 30 जुलाई और तीसरा 7 अगस्त को भेजा गया था। इन पत्रों में कथित भ्रष्टाचार के मामले से संबंधित सामग्री और साक्ष्य साझा किए जाने की बात सामने आई।
सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि यदि केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से पंजाब पुलिस को जानकारी और साक्ष्य उपलब्ध कराए गए थे तो उन पर अब तक क्या कार्रवाई की गई।
अदालत ने पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए मामले में CBI को भी नोटिस जारी किया था।
राजनीतिक आरोपों के बीच अब ED और पंजाब पुलिस के बीच दस्तावेजों को लेकर बढ़ा विवाद
फिलहाल, इस मामले में पंजाब पुलिस और ED के बीच दस्तावेजों और सबूतों को लेकर खींचतान जारी है। पंजाब पुलिस ने ED अधिकारी को 3 सितंबर को मुख्यालय पहुंचने के लिए कहा है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि ED पंजाब पुलिस को मामले से संबंधित कौन-कौन से दस्तावेज और सबूत उपलब्ध कराती है और जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है।
