30 अगस्त को तय होगी आंदोलन की अगली रणनीति
जालंधर, 27 अगस्त: मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के सरकारी कर्मचारियों एवं पेंशनरों के बीच गुरुवार को प्रस्तावित बैठक रद्द होने से कर्मचारी संगठनों में भारी रोष है। बैठक नहीं होने के बाद विभिन्न कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने जालंधर में प्रेस वार्ता कर सरकार पर बातचीत से पीछे हटने और कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया।
पीएसएमएसयू के प्रधान गुरनाम सिंह, पंजाब सचिवालय एक्शन कमेटी के प्रधान सुखचैन सिंह खेहरा तथा पंजाब मुलाजिम एवं पेंशनर संयुक्त फ्रंट और संयुक्त मुलाजिम मंच से जुड़े नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से स्पष्ट किया गया कि हड़ताल और बातचीत एक साथ नहीं चल सकती। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि वे पहले हड़ताल खत्म करने की शर्त पर किसी भी बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं।
बार-बार बैठक बुलाने के बाद पीछे हटने का आरोप
कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार पहले बैठक के लिए बुलाती है और बाद में कोई शर्त लगाकर बातचीत टाल देती है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं हुआ है। कर्मचारियों की हड़ताल 17 अगस्त से जारी है। 27 अगस्त को तालमेल कमेटी के आह्वान पर कर्मचारियों और पेंशनरों ने सामूहिक छुट्टी लेकर प्रदेशभर में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
नेताओं ने कहा कि सामूहिक छुट्टी का उद्देश्य सरकार के प्रति रोष जताने के साथ मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी मांगें रखना भी था, लेकिन बैठक रद्द होने से कर्मचारियों में नाराजगी और बढ़ गई है।
28 अगस्त को प्रदेशभर में पुतला फूंक प्रदर्शन
बैठक रद्द होने के विरोध में कर्मचारी संगठनों ने 28 अगस्त को पंजाबभर में मुख्यमंत्री भगवंत मान के पुतले फूंकने का ऐलान किया है। नेताओं ने कहा कि 30 अगस्त को विभिन्न संगठनों की बैठक बुलाकर आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में आंदोलन को और बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा।
पुलिस पर प्रदर्शनकारियों को रोकने का आरोप
कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से मिलने के लिए समय निर्धारित होने के बावजूद उन्हें पुलिस ने कार्यक्रम स्थल पर रोक दिया। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें बाहर धूप में खड़ा रखा गया। नेताओं के अनुसार जालंधर में वाटर कैनन भी तैनात किए गए थे।
उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ सचिवालय, बठिंडा, फरीदकोट और मानसा सहित अन्य स्थानों पर भी कर्मचारियों के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की ओर से कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए।
‘हम राज्य विरोधी नहीं, सरकार की नीतियां लागू करते हैं’
कर्मचारी नेताओं ने अपने ऊपर लगाए जा रहे ‘एंटी स्टेट’ और सरकार विरोधी होने के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं और नीतियों को लागू करने का काम कर्मचारी ही करते हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को राज्य विरोधी बताना गलत है। सरकार की योजनाओं से लेकर प्रशासनिक कार्यों तक कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
2027 में सरकार को जवाब देने की चेतावनी
कर्मचारी नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए सरकार को चेतावनी दी कि 2027 में कर्मचारी और पेंशनर इसका जवाब देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों की मांगों से बच रही है और पंजाब की आर्थिक स्थिति भी लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
नेताओं ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ टकराव का रास्ता छोड़कर बातचीत के जरिए उनकी मांगों का समाधान करना चाहिए।
कर्मचारी संगठनों ने साफ किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस बातचीत और समाधान नहीं होता, संघर्ष जारी रहेगा। 28 अगस्त के प्रदर्शन के बाद आंदोलन को और तेज करने की तैयारी की जाएगी।
