EWS आरक्षण : संविधान को सिर के बल पलट दिया गया’, EWS आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने उठाए सवाल

by

  नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को लेकर बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि संविधान में 103वें संशोधन के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू करना संविधान को उलटने जैसा है।

इस संबंध में जस्टिस नरीमन ने 2022 में 3:2 संविधान पीठ के फैसले में ईडब्ल्यूएस आरक्षण को बरकरार रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट की भी कड़ी आलोचना की। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने कहा कि इस संशोधन जो भी हासिल किया है, वह संविधान के उलटने से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने कुछ समुदायों के प्रति ऐतिहासिक गलतियों के कारण उत्पन्न सामाजिक असमानताओं को कम करने के लिए आरक्षण की परिकल्पना की थी, तथा संविधान निर्माताओं ने इसके लिए कभी भी आर्थिक मानदंड की परिकल्पना नहीं की थी।

नरीमन ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 46 राज्य को अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि मेरे अनुसार, अनुच्छेद 46 आर्थिक मानदंडों के आधार पर वर्गीकरण को बिल्कुल भी उचित नहीं ठहराता है। इसे सरलता से पढ़ने पर ही आपको यह पता चल जाएगा। अंतिम भाग को सभी पांचों न्यायाधीशों ने पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है।

जस्टिस नरीमन ने कहा कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण अनुच्छेद 46 के ठीक विपरीत है, क्योंकि इसमें ऊंची जाति के हिंदुओं, मुसलमानों और ईसाइयों को आरक्षण की अनुमति दी गई है, जबकि उन्हें कभी भी ऐतिहासिक रूप से कोई नुकसान नहीं हुआ।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस ने कहा कि आप उन सभी को बाहर कर देते हैं जिन्हें शामिल करने की आवश्यकता है, जैसे एससी, एसटी, ओबीसी। उन्हें बाहर करने के बाद आप किसे शामिल करते हैं? इस पर ध्यान नहीं दिया जाता है। आप केवल उच्च जातियों को शामिल कर रहे हैं। यदि आप इन सभी लोगों को बाहर रखते हैं तो आप किसे शामिल करेंगे? आप केवल ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य और मुस्लिम और ईसाई को ही शामिल करते हैं। अब यह एक बड़ी समस्या बन जाती है क्योंकि जब आप इन लोगों को शामिल करते हैं तो ऐतिहासिक गलतियों के अलावा किसी भी आरक्षण का कोई सवाल ही नहीं है।

जस्टिस नरीमन ने आगे कहा कि इन लोगों को कभी भी इस तरह का कोई अन्याय नहीं सहना पड़ा, लेकिन फिर भी आप उनके लिए कुछ बचा कर रख रहे हैं। और जहां ऐतिहासिक गलतियां हुई हैं, आप उनके लिए कुछ भी सुरक्षित नहीं रख रहे हैं। इसलिए वास्तव में संविधान अब उलट गया है।

मुसलमानों और ईसाइयों के संबंध में न्यायमूर्ति नरीमन ने कहा कि उन्हें आरक्षण के दायरे में शामिल नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे पहले से ही संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत संरक्षित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुसलमानों और ईसाइयों के मामले में यह मत भूलिए कि अनुच्छेद 341 के तहत सुप्रीम कोर्ट की राष्ट्रपति सूची में विशेष रूप से कहा गया था कि यह केवल हिंदुओं के लिए है। आप इसमें मुसलमानों और ईसाइयों को शामिल नहीं कर सकते। हमारे संविधान निर्माताओं ने कहा था कि चूंकि आपके पास आरक्षण का अधिकार नहीं है, इसलिए हम आपको एक और अधिकार देंगे जो अनुच्छेद 30 है।

उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि ईडब्ल्यूएस ने इस सब को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को अल्पसंख्यक संगठन स्थापित करने और चलाने का अधिकार देता है। इन सभी बातों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है और अब एक संवैधानिक संशोधन, जिसने संविधान को पूरी तरह से बदल दिया है। उसको इन तीन न्यायाधीशों द्वारा पूर्ण स्वीकृति प्रदान की गई है।

जस्टिस नरीमन ने उन दो न्यायाधीशों के विचारों पर भी सवाल उठाया जो संविधान पीठ के बहुमत की राय से भिन्न राय रखते थे। उन्होंने कहा कि यह एक दुर्लभ मामला है जहां आर्थिक आरक्षण की अवधारणा के मामले में बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक दोनों ही गलत थे। नरीमन ने कहा कि ईडब्ल्यूएस निर्णय न तो संवैधानिक कानून के आधार पर और न ही किसी भी प्रकार के सिद्धांत के आधार पर सही है।

Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
पंजाब

तरुण चुग को मध्य प्रदेश से राज्य सभा के लिए मैदान में उतारा

चंडीगढ़ : भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने 11 उम्मीदवारों की बहुप्रतीक्षित सूची जारी कर दी है। इस सूची में क्षेत्रीय और सांगठनिक समीकरणों को साधने का पूरा प्रयास किया गया...
article-image
हिमाचल प्रदेश

स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत विकसित होगा पोंग बांध क्षेत्र : क्षेत्र के अनुरूप हो पर्यटन गतिविधियों का विस्तार, स्थानीय संस्कृति और विरासत को मिले पहचान- डीसी डॉ. निपुण जिंदल

धर्मशाला, 3 नवम्बर। पोंग बांध क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उसके साथ लगती जगहों के अनुरूप गतिविधियों को विकसित और बढ़ावा देने की जरूरत है। स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत जिला...
article-image
पंजाब , समाचार

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने किसानों को दिया बड़ा तोहफ़ा : मालवा क्षेत्र के चार ज़िलों तक पहुँचा नहर का पानी

मालवा क्षेत्र की लाइफ़लाइन मानी जाने वाली फ़िरोज़पुर फीडर नहर, फ़रीदकोट, फ़िरोज़पुर, श्री मुक्तसर साहिब और फ़ाज़िल्का ज़िलों के लिए वरदान साबित होगी- भगवंत सिंह मान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज...
article-image
हिमाचल प्रदेश

विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने प्रभारी सुखदेव भगत के साथ “संगठन सृजन अभियान” के तहत की चर्चा

एएम नाथ। चुवाड़ी : हिमाचल प्रदेश विधानसभा के माननीय अध्यक्ष आदरणीय श्री कुलदीप सिंह पठानिया जी ने जिला चंबा के प्रभारी  सुखदेव भगत जी के साथ “संगठन सृजन अभियान” के तहत भटियात विधानसभा क्षेत्र...
Translate »
error: Content is protected !!