HRTC अब घाटे वाले रूटों पर नहीं चलाएगा बसें

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एएम नाथ । शिमला : हिमाचल प्रदेश सरकार ने साफ किया है कि राज्य परिवहन निगम (एचआरटीसी) आर्थिक रूप से नुकसान वाले बस रूटों पर सेवाएं नहीं चलाएगा। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बुधवार को विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में यह जानकारी दी।

उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों की वजह से कई रूट अस्थायी रूप से बंद किए गए हैं और जैसे ही सड़कें ठीक होंगी, इन पर बस सेवाएं फिर से शुरू कर दी जाएंगी।

विधायक डीएस ठाकुर के सवाल का जवाब देते हुए अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार बिना किसी भेदभाव के काम कर रही है और विपक्षी विधायकों के क्षेत्रों के साथ किसी तरह का पक्षपात नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चंबा जिले में इस समय एचआरटीसी की 203 बसें चल रही हैं, लेकिन कुछ रूट ऐसे हैं जहां यात्रियों की संख्या बहुत कम है। ऐसे रूट आर्थिक रूप से घाटे में हैं, इसलिए वहां बसें चलाना संभव नहीं है।

उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि परिवहन निगम अपने बेड़े को भी चरणबद्ध तरीके से अपडेट कर रहा है। जिन बसों ने 9 लाख किलोमीटर का सफर पूरा कर लिया है या जिनकी उम्र 15 साल से ज्यादा हो गई है, उन्हें सेवा से हटाया जाएगा। उन्होंने विपक्ष द्वारा निगम की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवालों पर आपत्ति जताई और कहा कि एचआरटीसी हर दिन करीब पांच लाख यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचा रहा है, जो अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी है।

अग्निहोत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि लंगेरा और सलूणी से टांडा के लिए सीधी बस सेवा शुरू नहीं की जाएगी, क्योंकि इस रूट पर पहले से ही कनेक्टिंग बस सेवा उपलब्ध है।

हालांकि, इस मुद्दे पर विपक्षी विधायकों ने सरकार के रुख पर सवाल उठाए। विधायक डीएस ठाकुर और हंसराज ने कहा कि एक कल्याणकारी राज्य होने के नाते सरकार का दायित्व है कि वह लोगों को बस सेवा उपलब्ध कराए, भले ही कोई रूट आर्थिक रूप से लाभकारी न हो। विधायक हंसराज ने यह भी आरोप लगाया कि चंबा जिले में कई रूट बसों की कमी के कारण बंद किए गए हैं।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी सरकार से अपील की कि वह आर्थिक लाभ से ऊपर उठकर लोगों की सुविधा को प्राथमिकता दे। उन्होंने मांग की कि बिना किसी भेदभाव के विपक्षी क्षेत्रों में भी बस सेवाएं चलाई जाएं, जिससे लोगों को परिवहन सुविधा से वंचित न रहना पड़े।

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