बीचुल टॉप में पूजा-अनुष्ठान के बाद देवता देहरी पहुंचे, देवलुओं को दिया आशीर्वाद…. घी से भरे पात्रों से हुआ पारंपरिक स्वागत : फलाचन घाटी में निभाई गई देवता शेष नाग की सदियों पुरानी परंपरा

by

बठाहड़, बंजार(परस राम भारती) । जिला कुल्लू के बंजार उपमंडल की फलाचन घाटी में आराध्य देवता श्री शेष नाग जी से जुड़ी सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा इस वर्ष भी श्रद्धा और आस्था के साथ निभाई गई। तीन भाद्र के अवसर पर देवता शेष नाग जी ने अपने प्राचीन देवस्थान बीचुल टॉप में धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना के बाद अपनी देहरी की ओर प्रस्थान किया। देवता के लौटने पर क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह का माहौल रहा।

परंपरा के अनुसार हर तीन वर्ष बाद तीन भाद्र को देवता शेष नाग जी अपने मूल देवस्थान बीचुल टॉप जाते हैं। समुद्र तल से करीब 4,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस स्थान को देवता का प्राचीन और पवित्र स्थल माना जाता है। यहां देव कारदारों और पुजारियों ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करवाए।

घी से भरे पात्रों से हुआ पारंपरिक स्वागत

धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद देवता शेष नाग जी ठेहर पहुंचे, जहां उन्होंने देवलुओं और श्रद्धालुओं को दर्शन देकर आशीर्वाद प्रदान किया। देवता के आगमन पर ग्रामीणों ने सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार घी से भरे पात्रों के साथ उनका पारंपरिक स्वागत किया। इस दौरान पूरा क्षेत्र देव आस्था और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से भक्तिमय नजर आया।

देवता की इस यात्रा में कारदार, देवलु, पुजारी, वाद्ययंत्र वादक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यात्रा के दौरान स्थानीय देव संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों की अनूठी झलक देखने को मिली।

क्षेत्र के सुख-समृद्धि के लिए होती है यात्रा

स्थानीय मान्यता के अनुसार हर तीन वर्ष बाद होने वाली यह धार्मिक यात्रा देवता की शक्ति अर्जित करने और क्षेत्र के कल्याण के लिए की जाती है। ग्रामीणों का विश्वास है कि देवता शेष नाग जी के आशीर्वाद से क्षेत्र में सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और जनमानस की रक्षा होती है।

गजरमाल अर्पित करने की परंपरा

देहरे में पहुंचने के बाद देवता शेष नाग जी को गजरमाल अर्पित करने की परंपरा भी निभाई जाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार गजरमाल श्रद्धा, भक्ति, सेवा और समर्पण का प्रतीक है। इसे देवता के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास से जुड़े महत्वपूर्ण धार्मिक संस्कार के रूप में देखा जाता है।

इस धार्मिक यात्रा के दौरान देवता शेष नाग जी के गुर भागसिंह, कारदार चंदे राम, पुजारी कुमतराम, मेहता गौतम राम, मुन्शी हेत राम, मोती राम, डोला राम, राम कृष्ण और पूर्ण चंद सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

ग्रामीणों का कहना है कि तीन भाद्र की यह परंपरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि फलाचन घाटी की समृद्ध देव संस्कृति, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। उनका कहना है कि ऐसी सदियों पुरानी परंपराओं को जीवित रखना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
हिमाचल प्रदेश

हमीरपुर में कुल 4 नामांकन, अंतिम दिन 3 प्रत्याशियों ने भरे पर्चे

हमीरपुर 21 जून। विधानसभा क्षेत्र 38-हमीरपुर के उपचुनाव की नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन शुक्रवार को 3 उम्मीदवारों ने पर्चे भरे। सबसे पहले, प्रदीप कुमार ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल...
article-image
हिमाचल प्रदेश

11.55 करोड़ रुपए की ठगी : हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक हटली शाखा में 11.55 करोड़ रुपए की ठगी मामले में साइबर पुलिस ने बेंगलुरु से गिरफ्तार किया व्यक्ति

एएम नाथ। धर्मशाला : हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक का सर्वर हैक कर 11.55 करोड़ रुपए की ठगी मामले को लेकर साइबर पुलिस ने बेंगलुरु से एक और गिरफ्तारी की है। साइबर पुलिस ने...
हिमाचल प्रदेश

इंदिरा गांधी खेल मैदान में सेना भर्ती 17 मार्च से 6 अप्रैल तक

ऊना : इंदिरा गांधी खेल मैदान, ऊना में 17 मार्च से 06 अप्रैल तक सेना भर्ती रैली का आयोजन किया जा रहा है। जिला हमीरपुर, बिलासपुर और ऊना के पुरुष उम्मीदवारों हेतु सेना भर्ती...
article-image
हिमाचल प्रदेश

जनगणना-2027 के लिए फ़ील्ड प्रशिक्षकों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आरंभ

अधिकारियों को निष्ठा व ईमानदारी से कार्य करने के निर्देश एएम नाथ। चम्बा : उपायुक्त व जिला जनगणना अधिकारी मुकेश रेपसवाल की अध्यक्षता में आज बचत भवन चंबा में जनगणना-2027 के लिए चंबा जिला...
Translate »
error: Content is protected !!