PWD की मनमानी के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा को दरकिनार कर गलत रूट पर सड़क निर्माण का विरोध

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466.76 लाख की सड़क परियोजना पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने आंदोलन की दी चेतावनी

पुनीत महाजन :  चंडीगढ़/बारां |  राजस्थान के बारां जिले के छबड़ा क्षेत्र में ग्राम पंचायत कड़ैयाहाट से गोडियामेहर तक प्रस्तावित 6 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। करीब 466.76 लाख रुपये की लागत से बनने वाली इस सड़क परियोजना को लेकर ग्रामीणों ने सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

मामले को लेकर ग्रामीणों ने एक बार फिर क्षेत्रीय विधायक प्रताप सिंह सिंघवी के निजी आवास पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और आरोप लगाया कि विभाग स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की मांग को नजरअंदाज कर मनमाने तरीके से सड़क का निर्माण करना चाहता है।

जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा को किया नजरअंदाज ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत प्रधान हरि ओम नगर, सरपंच दोली बाई तथा क्षेत्रीय विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने स्पष्ट रूप से अनुशंसा की है कि सड़क का निर्माण राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय एवं पुरानी पुलिस चौकी वाले मार्ग से किया जाए। उनका कहना है कि यह मार्ग आम ग्रामीणों के लिए अधिक सुगम, उपयोगी और जनहित में है।

इसके बावजूद, PWD विभाग इस मार्ग को छोड़कर अटलपुरा मार्ग से सड़क निर्माण कराने पर अड़ा हुआ है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

भ्रष्टाचार और धांधली की आशंका

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिस मार्ग का चयन विभाग द्वारा किया जा रहा है, वहां न तो कोई बड़ी आबादी निवास करती है और न ही किसानों की कृषि भूमि है। उनका कहना है कि इस मार्ग का चयन केवल कुछ प्रभावशाली लोगों को व्यक्तिगत लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया प्रतीत होता है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार पत्राचार और अनुशंसा किए जाने के बावजूद विभाग ने उनकी मांगों की अनदेखी की है, जो सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक मनमानी का उदाहरण है।

निर्माण कार्य रोकने की चेतावनी

ग्रामवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने अपनी जिद नहीं छोड़ी और जनहित के विपरीत चयनित मार्ग पर निर्माण कार्य शुरू किया, तो वे इसका पुरजोर विरोध करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि यदि इस मुद्दे को लेकर कोई विवाद या अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी।

अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप कर जनभावनाओं और जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा के अनुरूप निर्णय लेते हैं या फिर यह विवाद आगे चलकर बड़े जनआंदोलन का रूप लेता है।

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