SCO में मोदी-पेजेशकियन की मुलाकात, पश्चिम एशिया संकट और व्यापार पर हुई चर्चा

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होर्मुज में नौवहन और वाणिज्य की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने पर भारत का जोर; सभी विवाद बातचीत से सुलझाने की पैरवी

बिश्केक/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और तेजी से बदलते क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई। यह पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की मुलाकात है।

भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और भारत के इस रुख को दोहराया कि सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। उन्होंने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए लगातार प्रयास किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

होर्मुज में सुरक्षित नौवहन पर भारत का जोर

मुलाकात के दौरान मोदी ने नौवहन और वाणिज्य की स्वतंत्रता सुरक्षित रखने की जरूरत पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में आम नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे, वाणिज्यिक जहाजों और समुद्री कर्मचारियों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। यह मुद्दा भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।

भारत-ईरान संबंध और व्यापार पर भी चर्चा

दोनों नेताओं ने भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और ईरान की दीर्घकालिक मित्रता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई और व्यापार को व्यापक एवं विविध बनाने की इच्छा जताई।

मोदी ने बहुपक्षीय मंचों, विशेषकर SCO और BRICS, में ईरान के साथ सहयोग जारी रखने की बात कही। उन्होंने राष्ट्रपति पेजेशकियन को भारत में होने वाले आगामी BRICS शिखर सम्मेलन में आमंत्रित भी किया।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच अहम मुलाकात

मोदी और पेजेशकियन की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। हालिया सैन्य टकराव के बाद पश्चिम एशिया की स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी है। ईरानी राष्ट्रपति ने भी संघर्ष के बावजूद बातचीत के जरिए समाधान की इच्छा दोहराई है।

भारत लगातार पश्चिम एशिया में तनाव कम करने, कूटनीतिक समाधान और सुरक्षित समुद्री व्यापार मार्गों की वकालत कर रहा है। मोदी-पेजेशकियन की बैठक को इसी संदर्भ में भारत-ईरान संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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