SGPC जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) कानून पर पुनर्विचार करेगी : एसजीपीसी 20 अप्रैल को बुलाई बैठक

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अमृतसर :  शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की अंतरिम कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक 20 अप्रैल को प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी की अगुवाई में आयोजित की जाएगी। इस बैठक में जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) कानून को लेकर 15 सदस्यीय कमेटी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

जानकारी के अनुसार 15 सदस्यीय कमेटी ने 27 मार्च को बैठक कर कानून के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया था। इसके बाद 6 अप्रैल को तेजा सिंह समुंदरी हॉल स्थित मुख्य कार्यालय में विभिन्न सिख जत्थेबंदियों के साथ बैठक कर उनके सुझाव लिए गए। इन सुझावों और प्रस्तावों पर 7 अप्रैल को भी समीक्षा की गई थी।

कमेटी ने कानून के मसौदे को समझने के लिए सरकार से संपर्क भी किया था, लेकिन उन्हें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई। इसके बावजूद 13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में बेअदबी से संबंधित कानून में संशोधन कर इसे पारित कर दिया गया और बाद में इसे राज्यपाल की मंजूरी भी मिल गई।

कानून पारित होना सकारात्मक कदम

एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी पहले ही इस मुद्दे पर स्पष्ट कर चुके हैं कि सिख समुदाय लंबे समय से इस गंभीर विषय पर ठोस और प्रभावी कानून की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि कानून पारित होना सकारात्मक कदम है, लेकिन इसका सही तरीके से लागू होना सबसे अधिक जरूरी है।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले भी पूर्व सरकारों के समय इस प्रकार के विधेयक दो बार पारित किए जा चुके हैं, लेकिन वे लागू नहीं हो पाए। ऐसे में इस बार कानून के क्रियान्वयन को लेकर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

सरकार ने एसजीपीसी से कोई औपचारिक राय नहीं ली

बैठक में इस बात पर भी चर्चा होने की संभावना है कि कानून तैयार करते समय सरकार ने एसजीपीसी से कोई औपचारिक राय नहीं ली। इसके अलावा हाल ही में सामाजिक माध्यमों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक के जरिए सिख भावनाओं को आहत करने वाली एक वीडियो के प्रसार का मामला भी उठ सकता है। इस वीडियो को एसजीपीसी ने विभिन्न मंचों से हटवाया, जबकि सरकार की कार्रवाई को लेकर असंतोष जताया जा रहा है।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने इससे पहले धार्मिक ग्रंथों के विरुद्ध अपराध रोकथाम से संबंधित विधेयक के लिए एक चयन समिति का गठन किया था। एसजीपीसी की 15 सदस्यीय कमेटी ने अपने सुझाव देने के लिए कई बार सरकार से संपर्क किया, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

ऐसे में अब 20 अप्रैल की बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें इस पूरे मुद्दे पर अगली रणनीति और रुख तय किया जा सकता है।

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