चंडीगढ़। पंजाब में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। मतदाता सूची से हटाए गए नामों के आंकड़ों ने आगामी विधानसभा चुनाव के समीकरणों को लेकर राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है।
उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, SIR के तहत हटाए गए मतदाताओं का असर पंजाब की 117 में से करीब 75 विधानसभा सीटों के चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है। इनमें 35 सीटें ऐसी हैं, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत-हार का अंतर 10 हजार वोट से कम था, जबकि कई सीटों पर हटाए गए मतदाताओं की संख्या पिछली जीत के अंतर से कई गुना अधिक है।
20.66 लाख से ज्यादा नाम मतदाता सूची से हटाए गए
SIR के दौरान पंजाब में कुल 20,66,635 नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है, जो स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए हैं।
| श्रेणी | हटाए गए वोटर | प्रतिशत |
|---|---|---|
| स्थायी रूप से दूसरी जगह गए | 9,44,131 | 45.67% |
| मृत | 5,74,568 | 27.80% |
| अनुपस्थित/पता नहीं चला | 4,12,715 | 19.96% |
| डुप्लीकेट/कहीं और नाम दर्ज | 1,19,145 | 5.76% |
| कुल | 20,66,635 | 100% |
इन आंकड़ों के कारण राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती वास्तविक मतदाताओं की पहचान और छंटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा सूची में शामिल कराने की है।
6 बड़े जिलों की 52 सीटों पर सबसे ज्यादा असर
SIR के दौरान जिन छह बड़े जिलों में सबसे ज्यादा मतदाता सूची से बाहर हुए हैं, वहां कुल 52 विधानसभा सीटें हैं। इन सीटों पर 2022 में आम आदमी पार्टी का दबदबा रहा था।
इन 52 सीटों में:
- AAP: 39 सीटें
- कांग्रेस: 11 सीटें
- शिरोमणि अकाली दल: 2 सीटें
- भाजपा: 0 सीटें
इनमें से 11 सीटों पर 2022 में जीत-हार का अंतर 10 हजार वोट से कम था। ऐसे में मतदाता सूची में हुए बड़े बदलाव को आगामी चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लुधियाना में सबसे ज्यादा मतदाता सूची से बाहर
छह जिलों में कुल 12,45,904 मतदाता ASDD यानी Unavailable/Deleted श्रेणी में आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा नाम लुधियाना में हटे हैं।
| जिला | ASDD/अनअवेलेबल वोटर | प्रतिशत |
|---|---|---|
| लुधियाना | 4,16,088 | 15.50% |
| अमृतसर | 2,42,751 | 12.30% |
| जालंधर | 1,84,997 | 11.21% |
| पटियाला | 1,38,624 | 9.12% |
| SAS नगर (मोहाली) | 1,53,714 | 17.99% |
| गुरदासपुर | 1,09,730 | 8.48% |
| कुल | 12,45,904 | 12.49% |
इन छह जिलों में कुल 99,74,207 मतदाता और 52 विधानसभा सीटें हैं।
2022 में AAP का रहा था दबदबा
इन छह जिलों की 52 विधानसभा सीटों के 2022 के परिणाम पर नजर डालें तो आम आदमी पार्टी सबसे आगे रही थी।
- लुधियाना की 14 सीटें: AAP 13, SAD 1
- अमृतसर की 11 सीटें: AAP 9, कांग्रेस 1, SAD 1
- जालंधर की 9 सीटें: AAP 4, कांग्रेस 5
- मोहाली की 3 सीटें: AAP 3
- पटियाला की 8 सीटें: AAP 8
- गुरदासपुर की 7 सीटें: AAP 2, कांग्रेस 5
कुल मिलाकर AAP ने 52 में से 39 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस को 11 और SAD को 2 सीटें मिली थीं। भाजपा इनमें से किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर सकी थी।
35 सीटों पर जीत के मार्जिन से ज्यादा वोट हटे
पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनाव में 35 सीटें ऐसी थीं, जहां हार-जीत का अंतर 500 से लेकर 9,900 वोट के बीच रहा था। SIR में इन सीटों पर हटाए गए या सत्यापन के दायरे में आए मतदाताओं की संख्या कई जगह 15 हजार से 30 हजार तक बताई जा रही है।
यानी कई सीटों पर मतदाता सूची में हुए बदलाव की संख्या पिछली जीत के अंतर से दो से तीन गुना तक अधिक है। इससे आगामी चुनाव में पुराने चुनावी समीकरणों के बदलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि मतदाता सूची से नाम हटने का अर्थ यह नहीं है कि सभी हटाए गए मतदाता किसी एक राजनीतिक दल के समर्थक थे। इसलिए केवल इन आंकड़ों के आधार पर किसी पार्टी को सीधे फायदा या नुकसान होने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
प्रवासी मजदूर और किराएदार बने अहम फैक्टर
लुधियाना, जालंधर और मोहाली जैसे औद्योगिक एवं व्यावसायिक केंद्रों में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर और किराएदार रहते हैं। बार-बार पता बदलने, लंबे समय तक अनुपस्थित रहने अथवा दस्तावेजों से जुड़े कारणों के चलते इस वर्ग के कई नाम सत्यापन प्रक्रिया के दायरे में आए हैं।
ऐसे में शहरी और औद्योगिक विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक दलों को अपने बूथ स्तर के संगठन के जरिए वास्तविक मतदाताओं की स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
NRI पलायन और डुप्लीकेट नाम भी बड़ा मुद्दा
पंजाब से बड़ी संख्या में युवा विदेशों में जा चुके हैं। ऐसे मतदाताओं के नाम यदि पुराने पते पर दर्ज हैं, तो SIR के दौरान अनुपस्थित या स्थानांतरित श्रेणी में उनकी पहचान हो सकती है।
डुप्लीकेट या एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नाम हटाए जाने से मतदाता सूची अधिक सटीक होने का दावा किया जा रहा है। दूसरी ओर, राजनीतिक दलों के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती भी है कि वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम गलती से सूची से बाहर न हों।
राजनीतिक दलों को बूथ स्तर पर करनी होगी बड़ी तैयारी
SIR के बाद अब सभी राजनीतिक दलों के लिए बूथ स्तर पर मतदाता सूची की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटे हैं, उनके नाम दोबारा शामिल कराने के लिए राजनीतिक दलों के BLO और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय होना पड़ेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले चुनाव में केवल पारंपरिक वोट बैंक ही नहीं, बल्कि अपडेटेड और सत्यापित मतदाता सूची भी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनेगी।
क्या बदलेगा पंजाब का चुनावी गणित?
SIR के आंकड़े यह संकेत जरूर दे रहे हैं कि पंजाब की कई विधानसभा सीटों पर मतदाता सूची में बड़ा बदलाव हुआ है। खासकर कम अंतर से जीती गई सीटों पर यह बदलाव राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
लेकिन यह बदलाव किस पार्टी के पक्ष में जाएगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। अंतिम मतदाता सूची, दावों-आपत्तियों की प्रक्रिया और नए सिरे से जुड़े मतदाताओं के आंकड़े सामने आने के बाद ही तस्वीर ज्यादा स्पष्ट होगी।
फिलहाल इतना तय है कि SIR ने पंजाब के राजनीतिक दलों को बूथ स्तर पर अपने चुनावी गणित की दोबारा समीक्षा करने के लिए मजबूर कर दिया है।
