अकाली दल के पास अब नहीं बचा कोई विकल्प : कल स्वीकार होगा सुखबीर बादल का इस्तीफा

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चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल दस जनवरी को पार्टी प्रधान सुखबीर बादल सहित उन लोगों के इस्तीफे स्वीकार कर लेगा, जिन्होंने पिछले दिनों अपने इस्तीफे सौंपे थे। वर्किंग कमेटी ने अभी तक इन इस्तीफों को स्वीकार नहीं किया था।
हालांकि, इसे लेकर एक बैठक चंडीगढ़ में बुलाई गई थी पर युवा नेताओं के विरोध के कारण ये स्वीकार नहीं किए गए थे। दो दिसंबर को जब श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह सहित चार अन्य जत्थेदारों ने सुखबीर सहित तमाम अकाली लीडरशिप को सजा सुनाई थी, तब वर्किंग कमेटी से यह भी कहा था कि इनके इस्तीफे तीन दिन में स्वीकार करके तख्त साहिब को सूचित किया जाए।                 अकाली नेताओं ने पहले सेवा और बाद में शहीद जोड़ मेलों में व्यस्त रहने के कारण बीस दिन की मोहलत मांगी थी। साथ ही कानूनी पेचीदगियों का हवाला देकर आदेश के पालन से बचने का प्रयास किया था पर दो दिन पहले जब ज्ञानी रघबीर सिंह ने स्पष्ट शब्दों में एक बार फिर वर्किंग कमेटी के नेताओं से यह कह दिया कि आदेश का पालन किया जाए तो पार्टी नेताओं के पास कोई विकल्प नहीं बचा।
बुधवार को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह से अमृतसर में मिलने के बाद पार्टी के उपाध्यक्ष डा दलजीत सिंह चीमा ने अपने ‘एक्स’ पोस्ट पर जानकारी दी कि पार्टी की वर्किंग कमेटी की मीटिंग दस जनवरी को बुलाई गई हैl  जिसमें सुखबीर सहित जिन नेताओं ने इस्तीफे दिए हैं, उनपर विचार किया जाएगा।
बैठक कार्यकारी प्रधान बलविंदर सिंह भूंदड़ की अध्यक्षता में होगी। पार्टी की पुनर्गठन पर भी बात होगी और नए सिरे से भर्ती अभियान आरंभ किया जाएगा।  डॉ. दलजीत चीमा ने माघी मेले पर नई पार्टी का गठन करने की घोषणा करने वाले सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह, सांसद सर्बजीत सिंह खालसा एवं अन्य बागी गुट के नेताओं को चुनौती दी कि वे भारतीय संविधान एवं चुनाव आयोग की शर्तों के अनुरूप नई पार्टी का गठन करके तो दिखाएं? इसमें 36 तरह की चुनौतियां हैं। पार्टी के गठन के लिए संविधान धर्मनिरपेक्षता एवं लोकतंत्र के प्रति आस्था को लेकर शपथपत्र भी देना होगा। एक कट्टरपंथी विचारधारा नहीं बल्कि समस्त धर्मों के प्रतिनिधि सदस्यों की भर्ती करनी होगी।  पार्टी के गठन के उद्देश्य व अन्य लक्ष्य संबंधी 38 प्रश्नावली के लिखित उत्तर शपथपत्र में दर्ज करवाने होंगे। चुनाव आयोग व संविधान संबंधी शर्तों को पूरा करने के बाद ही नई पार्टी बनाने की अनुमति मिलेगी।
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