अमृतसर में आंबेडकर की प्रतिमा क्षतिग्रस्त किए जाने के खिलाफ दलित संगठनों का विरोध प्रदर्शन

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अमृतसर :   गणतंत्र दिवस पर बी. आर. आंबेडकर की प्रतिमा क्षतिग्रस्त करने के एक व्यक्ति के प्रयास के खिलाफ सोमवार को दलित संगठनों ने अमृतसर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया, जबकि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि मामले में कड़ी सजा सुनिश्चित की जाएगी।
पुलिस ने रविवार को पंजाब के मोगा जिले के धर्मकोट के निवासी आकाश सिंह को स्वर्ण मंदिर की ओर जाने वाली हेरिटेज स्ट्रीट पर स्थित टाउन हॉल में आंबेडकर की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया।
इस घटना का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें एक व्यक्ति स्टील की सीढ़ी का उपयोग करके प्रतिमा पर चढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है और उसके हाथ में हथौड़ा है। वीडियो में वह हथौड़े से प्रतिमा पर कई बार वार करता हुआ दिखाई दे रहा है। उस व्यक्ति ने संविधान की पुस्तक की प्रतिकृति को भी नुकसान पहुंचाया, जो प्रतिमा का हिस्सा है। बाद में उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया। घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अमृतसर के पुलिस आयुक्त गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने कहा कि संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
आकाश सिंह के परिवार को जानने वाले हरमीत सिंह ने बताया कि वह तीन साल पहले काम के लिए दुबई गया था। धर्मकोट निवासी सिंह ने बताया कि वह अपने परिवार से संपर्क में नहीं था।
उन्होंने बताया कि आकाश सिंह दो-तीन महीने पहले भारत लौट आया और अमृतसर में रहने लगा।
इस बीच, दलित समुदाय के लोगों ने घटना के खिलाफ अमृतसर में विरोध प्रदर्शन किया।
             दलित संगठनों के विरोध प्रदर्शन के कारण शहर में पूर्ण बंद का माहौल रहा। प्रदर्शनकारियों ने दुकानदारों को उनकी दुकानें बंद करने पर मजबूर कर दिया। शैक्षणिक संस्थानों को भी बंद के लिये बाध्य किया गया। विरोध प्रदर्शन का आयोजन बाल्मीकि समाज ने किया था और इसे विभिन्न राजनीतिक संगठनों का समर्थन भी मिला।
बाल्मीकि समाज के नेता संत बाबा मलकीत नाथ ने राज्य सरकार से आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने का अनुरोध किया। व्यस्त भंडारी ब्रिज इलाके में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया, जहां सरकार विरोधी नारे भी लगाए गए। शहर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए। मान ने कहा कि आरोपियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी। इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसने संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर का सम्मान करने वाले सभी लोगों को ठेस पहुंचाई है।
उन्होंने लोगों से संयम बरतने का अनुरोध करते हुए कहा कि किसी को भी राज्य में कड़ी मेहनत से कायम शांति को भंग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी तथा सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की पंजाब विरोधी ताकतों की नापाक साजिशें शुरू में ही नाकाम कर दी जाएंगी।  मान ने एक बयान में कहा कि उनकी सरकार पंजाब में अशांति पैदा करने की कोशिश करने वाले असामाजिक और राष्ट्रविरोधी तत्वों के नापाक मंसूबों को कुचलने के लिए पूरी तरह सतर्क और प्रतिबद्ध है। भुल्लर ने कहा कि आरोपी के मोबाइल फोन की जांच की जा रही है।
आयुक्त ने कहा कि विशेष पुलिस टीम उस व्यक्ति से पूछताछ कर रही है। उन्होंने कहा, “मैं सभी को आश्वस्त करता हूं कि निष्पक्ष जांच की जाएगी।”  भुल्लर ने कहा कि आरोपी से प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि वह अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय से है।
प्रतिमा पर चढ़ने के लिए आरोपी द्वारा इस्तेमाल की गई सीढ़ी के बारे में उन्होंने कहा कि यह पहले से ही वहां पड़ी थी क्योंकि एक संगठन के सदस्यों ने एक कार्यक्रम आयोजित किया था।  आयुक्त ने कहा कि कार्यक्रम के बाद सीढ़ी को हटाया नहीं गया और आरोपी ने इसका दुरुपयोग किया।
 उन्होंने कहा कि इस पहलू की भी जांच की जाएगी। इस बीच, कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला और पूर्व राज्य मंत्री राज कुमार वर्मा ने सोमवार को प्रतिमा को दूध से धोया।औजला ने घटना की निंदा की और दावा किया कि आरोपी ने प्रतिमा को आग लगाने की भी कोशिश की थी। उन्होंने बताया कि यह घटना उस समय हुई जब पूरा देश 76वां गणतंत्र दिवस मना रहा था। इस घटना की सभी राजनीतिक दलों ने कड़ी निंदा की है। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) की पंजाब इकाई के प्रमुख अमन अरोड़ा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “हम भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहब डॉ. भीम राव आंबेडकर जी की हेरिटेज स्ट्रीट, अमृतसर में स्थित प्रतिमा के अपमान की कड़ी निंदा करते हैं। हम किसी को भी पंजाब के सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने नहीं देंगे और अपराधियों को कड़ी सजा मिलेगी।”
कांग्रेस की पंजाब इकाई के प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा कि इस घटना के पीछे कोई “गहरी” साजिश हो सकती है। सांसद ने कहा, “इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।”
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता तरुण चुघ ने कहा कि दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए और साजिश का पर्दाफाश होना चाहिए।
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता सुखबीर सिंह बादल ने घटना की निंदा की और इससे जुड़ी “साजिश” का पता लगाने के लिए गहन जांच की मांग की।
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