आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी पर अपना आक्रोश जाहिर करते हुए जिस तरह इसे ‘हिंदू कार्ड’ खेला, उसने खुद उनकी ही पार्टी के कई लोगों को अचंभित किया होगा।
2013 में पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद मंच से ‘इंसान का इंसान से हो भाईचारा’ वाला गाना गाने वाले अरविंद केजरीवाल आमतौर पर मजहबी कार्ड खेलने से बचते हैं। वैसे तो उन्होंने इससे पहले भी कुछ मौकों पर सॉफ्ट हिंदुत्व के सहारे भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है, लेकिन जिस तरह उन्होंने ईडी की कार्रवाई को भी हिंदुओं से जोड़ा उसके मायने तलाशे जा रहे हैं।
सबसे पहले जानें केजरीवाल ने कहा क्या?
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर मंगलवार को एक पोस्ट में ईडी की रेड को हिंदू व्यापारियों के खिलाफ जोड़ते हुए कहा, ‘ED पार्टी आज फिर पंजाब के हिंदू व्यापारियों पर ED की रेड कर रही है। ED पार्टी पंजाब के छोटे-छोटे हिंदू व्यापारियों को तंग कर रही है। मेरी सभी व्यापारियों से अपील है – घबराने की कोई बात नहीं है, पूरा पंजाब और पंजाब सरकार आपके साथ है, हम सब मिलकर ED पार्टी का मुकाबला करेंगे।’ केजरीवाल इन दिनों भाजपा के लिए ‘ईडी पार्टी’ के संबोधन का इस्तेमाल करते हैं। पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़े कुछ ठिकानों पर छापेमारी को अरविंद केजरीवाल ने इसे हिंदुओं के खिलाफ कार्रवाई बताया था।
पंजाब को लेकर सतर्क केजरीवाल
‘आप’ की स्थापना के एक दशक के भीतर अपनी पार्टी को दो राज्यों में सत्ता दिलाने वाले अरविंद केजरीवाल राजनीति के महीन खिलाड़ी है। दिल्ली में तीन बार मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल भले ही अपने सबसे बड़े गढ़ में भाजपा से मुकाबला पिछले साल हार गए, लेकिन पंजाब को लेकर वह बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं। यह अलग बात है कि भाजपा पंजाब की लड़ाई में चौथे नंबर की पार्टी है, लेकिन जिस तरह भगवा दल ने हाल ही में पश्चिम बंगाल को फतह करके चौंकाया, उसको देखते हुए केजरीवाल हल्के में नहीं लेना चाहते हैं। ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि भाजपा यहां अकाली दल के साथ वर्षों तक शासन में रह चुकी है और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के ताजा बयान ने एक बार फिर दोनों पार्टियों के साथ आने के संकेत दिए हैं।
क्यों खेला हिंदू कार्ड
सवाल यह उठता है कि सिख बहुल पंजाब में अरविंद केजरीवाल ‘हिंदू कार्ड’ क्यों खेल रहे हैं? दरअसल, इसके पीछे भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग है, जिसे केजरीवाल सफल नहीं होने देना चाहेंगे। क्योंकि भाजपा हरियाणा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में दिखा चुकी है कि छोटे-छोटे वोट समूहों को जोड़कर वह बड़ा फेरबदल करने में माहिर है। भाजपा ने हाल ही में भले ही एक जट सिख सरदार केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब में अपना कप्तान बनाया, लेकिन यहां उसका दारोमदार मुख्य तौर पर हिंदू वोटर्स पर टिका है। भाजपा यहां हिंदुओं के साथ सिख वोटर्स को भी जोड़ने में जुटी है तो दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल की कोशिश पंजाब में भाजपा को हिंदुओं के खिलाफ बताकर भगवा दल को नुकसान पहुंचाने की है। पंजाब के कुल वोटर्स में जहां 57 फीसदी सिख हैं तो 38 फीसदी हिंदू हैं।
भाजपा और कांग्रेस ने केजरीवाल को घेरा
केजरीवाल के हिंदू कार्ड पर भाजपा और कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की है। दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने केजरीवाल के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की। उन्होंने एक वीडियो में कहा, ‘आगामी पंजाब चुनाव में अपनी हार को देखते हुए केजरीवाल जी ने आज सिख और हिंदू भाइयों को लड़ाने के लिए साजिश भरा बयान दिया है। उन्होंने ट्वीट किया कि ED हिंदू व्यापारियों के ऊपर रेड कर रही है। मैं पंजाब पुलिस से आग्रह करता हूँ की केजरीवाल जी के ऊपर दंगे भड़काने और एक शांतिमयी प्रदेश के अंदर आग लगाने की कोशिश करने के लिए उनके ऊपर कार्रवाई करनी चाहिए।’ वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मंगलवार को कहा कि पंजाब को ऐसी राजनीति से बचाने की जरूरत है जो समाज को बांटने का काम करती है। कांग्रेस नेता ने कहा कि पंजाब की पहचान किसी एक धर्म, वर्ग या समुदाय से नहीं जुड़ी है। पंजाब की असली ताकत भाईचारे, साझा विरासत और आपसी विश्वास में निहित है।
