तिवारी ने उभरती तकनीकों के लिए राजनीतिक सहमति और अधिक निवेश की जरूरत पर जोर दिया
चंडीगढ़ / मोहाली, 20 सितंबर: पूर्व केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री और चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने मोहाली स्थित इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) परिसर में आयोजित आईएसबी लीडरशिप समिट 2026 के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए, तेजी से बदलती विश्व व्यवस्था, बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और दुनिया के सामने मौजूद रणनीतिक अनिश्चितताओं पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए, तिवारी ने राज्य-प्रबंधन, वैश्विक शक्ति और अधिक जटिल एवं बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल में भारत की स्थिति से जुड़े बड़े सवालों पर अपने विचार रखे। उन्होंने इन बदलावों से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों और अवसरों के साथ-साथ भारत की रणनीतिक दिशा पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी चर्चा की।
इस अवसर पर अपने संबोधन में तिवारी ने कहा कि 2019 से 2026 के बीच दुनिया में बेहद बड़ा बदलाव आया है। यही कारण है कि उन्हें अपनी नई पुस्तक लिखने की प्रेरणा मिली, जिसका नाम ‘The World Adrift’ है। उन्होंने कहा कि बिजनेस के विद्यार्थियों के रूप में वे खुद को उस व्यापक भू-राजनीतिक ढांचे से अलग नहीं कर सकते, जो न केवल हमारी रोजमर्रा की कार्य-जीवन को बल्कि उससे भी अधिक एक सभ्यता के रूप में हमारे अस्तित्व को प्रभावित करता है। लेकिन दुर्भाग्य से चौथी औद्योगिक क्रांति की तकनीकों के क्षेत्र में भारत अभी तक अपनी पकड़ नहीं बना सका है। इसका कारण यह नहीं है कि देश में प्रतिभा की कमी है या क्षमता विकसित करने की योग्यता नहीं है, बल्कि कारण यह है कि इस क्षेत्र में पर्याप्त पूंजी निवेश नहीं किया जा रहा है।
तिवारी ने कहा कि अमेरिका में इस समय हो रहा एआई बुनियादी ढांचे का विस्तार शायद अमेरिका के ‘गिल्डेड एज’ के दौरान रेलवे के निर्माण के बाद सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट है। उन्होंने कहा कि इसी तरह चीन में भी सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में बड़े स्तर पर काम हो रहा है। उन्होंने जोर देते हुए, कहा कि यदि भारत को वह उभरती हुई बड़ी ताकत बनना है, जिसकी हम सभी अपने देश के लिए कामना करते हैं, तो भारत को अपनी क्षमता के अनुरूप पूरा जोर लगाना होगा।
तिवारी ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम अपनी बातों को अमल में लाएं और इसके लिए बहुदलीय सहमति की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके बिना, इन ध्रुवीकृत समय में भारत को विकास के अगले स्तर तक ले जाने की बड़ी परियोजना न केवल एक चुनौती बनी रहेगी, बल्कि एक मृगतृष्णा भी बन सकती है। भारत को 1991 जैसी एक लहर की जरूरत है, जब प्रधानमंत्री और उनके वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, जो बाद में प्रधानमंत्री बने, ने देश की आर्थिक दिशा को लेकर बहुदलीय सहमति बनाई थी।
इस दौरान अपने संबोधन को जारी रखते हुए, तिवारी ने कहा कि यह सहमति 1991 से 2026 तक विभिन्न सरकारों के दौरान कायम रही। इसी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की रचनात्मक ऊर्जा को मुक्त करने में मदद की और उसे विकास करने का अवसर दिया। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोगों को आर्थिक रूप से बेहतर जीवन की ओर ले जाने का लाभ मिला। उन्होंने कहा कि वह विद्यार्थियों के विचारार्थ यह बात इसलिए रख रहे हैं, क्योंकि आने वाले समय में उनमें से बहुत से लोग या शायद कुछ पहले से ही नीति-निर्माण की भूमिकाओं में होंगे।
तिवारी ने विद्यार्थियों से कहा कि वे इस बात को हमेशा ध्यान में रखें कि भारत को आर्थिक विकास के अगले स्तर तक ले जाने के लिए कुछ सहमत सिद्धांतों पर बहुदलीय सहमति बनाने में वे अपने तरीके से योगदान दे सकते हैं और इसके लिए प्रयास ऊपर से नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि आप ऐसी दुनिया विरासत में प्राप्त कर रहे हैं, जो उस दुनिया से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है, जिसका मैंने 45 साल पहले लॉ स्कूल पूरा करते समय सामना किया था। आप वे लोग हैं जो इस जटिल और तेजी से बदलती दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए आगे बढ़ेंगे। इसलिए यह बात ध्यान में रखें कि भारत को आगे ले जाने का रास्ता यही है कि इसके लिए प्रयास युवा भारतीयों और कॉरपोरेट भारत के लोगों की ओर से होना चाहिए। एक देश के रूप में हमें अपनी समस्याओं को सुलझाना होगा और यह देखना होगा कि जो लोग हम पर भरोसा और विश्वास करते हैं, हम उनके लिए और बेहतर क्या कर सकते हैं।
समिट के दौरान तिवारी ने अपनी पुस्तक ‘A World Adrift: A Parliamentarian’s Perspective on Global Power Dynamics’ पर एक दिलचस्प बातचीत में भी हिस्सा लिया। इस अवसर पर तिवारी ने कहा कि आईएसबी के बौद्धिक रूप से सक्रिय समुदाय के साथ विचार साझा करना और नेतृत्व, सार्वजनिक नीति तथा आधुनिक दुनिया को आकार देने वाली ताकतों में गहरी रुचि रखने वाले दर्शकों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करना उनके लिए गर्व की बात है। तिवारी ने कहा कि आईएसबी एक शानदार संस्थान है और यह बहुत ही शानदार एवं असाधारण तरीके से काम कर रहा है। यह मेरे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है, क्योंकि यह श्री आनंदपुर साहिब संसदीय क्षेत्र में आता है, जिसका मैंने 2019 से 2024 तक प्रतिनिधित्व किया था।
