उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 : कौन हैं 2 सांसद शेख अब्दुल राशिद व अमृतपाल सिंह, जो जेल से ही डालेंगे वोट

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नई दिल्ली । उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 में अभी नामांकन प्रक्रिया चल रही है। नामांकन की अंतिम तिथि 21 अगस्त है। 9 सितंबर 2025 को मतदान और उसी दिन मतगणना होनी है। जगदीप धनखड़ ने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही 21 जुलाई 2025 को अचानक इस्तीफा दे दिया था।

ऐसे में 17वें उपराष्ट्रपति के लिए चुनाव करवाए जा रहे हैं। इस बार के उपराष्ट्रपति चुनाव में दो सांसद जेल से भी वोट डालेंगे।

दरअसल, उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 में राज्यसभा के 233 सांसद (5 सीटें रिक्त), लोकसभा के 543 सांसद (एक सीट रिक्त) और राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्य वोट डालेंगे। इनमें से दो सांसद शेख अब्दुल राशिद और अमृतपाल सिंह भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे, मगर ये अन्य सांसदों की तरह मतदान कक्ष संख्या F-101, वसुधा, प्रथम तल, संसद भवन, नई दिल्ली में उपस्थित होकर नहीं बल्कि जेल से वोट डालेंगे।

शेख अब्दुल राशिद (इंजीनियर रशीद) जम्मू-कश्मीर के बारामुला से निर्दलीय और अमृतपाल सिंह पंजाब के खडूर साहिब से निर्दलीय सांसद हैं। दोनों ने लोकसभा चुनाव 2024 में जेल बंद रहते हुए चुनाव लड़ा और जीत भी दर्ज की। अब भी जेल में हैं। इस बीच उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 हो रहे हैं। इसलिए इन दोनों सांसदों को पोस्टल बैलेट से अपना वोट डालने की अनुमति दी गई है। दोनों सांसदों को अभी सजा नहीं हुई है। वे सिर्फ न्यायिक हिरासत में हैं। इसलिए उन्हें वोट डालने का अधिकार है।

अमृतपाल सिंह कौन हैं?

अमृतपाल सिंह संधू का जन्म 17 जनवरी 1993 को पंजाब के अमृतसर जिले की बाबा बकाला तहसील के गांव जल्लुपुर खेड़ा में तरसेम सिंह व बलविंदर कौर के घर में हुआ। अमृतपाल ने 2009 में कपूरथला के लॉर्ड कृष्णा पॉलिटेक्निक कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स में दाखिला लिया। उन्होंने तीन साल बाद पढ़ाई छोड़ दी और साल 2012 में अमृतपाल अपने परिवार के परिवहन बिजनेस को संभालने के लिए दुबई चले गए।

साल 2019 में भारत में चल रहे किसान आंदोलन का समर्थन करने के लिए अमृतपाल दुबई से देश लौट आए और दीप सिद्धू के साथ मिलकर कृषि कानून वापस लिए जाने के आवाज उठानी शुरू की। सिद्धू को साल 2021 में गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के लाल किले पर हुई हिंसा में शामिल होने के आरोप में जेल जाना पड़ा।

ज़मानत पर रिहा होने के बाद सिद्धू ने पंजाब के अधिकारों के लिए लड़ने के ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन की स्थापना की, जिससे अमृतपाल सिंह भी जुड़ गए। अमृतपाल सिंह पर खालिस्तान समर्थक गतिविधियों, भड़काऊ भाषण देने, सांप्रदायिक तनाव फैलाने और हथियारबंद भीड़ के साथ पुलिस थानों पर हमले जैसे गंभीर आरोप लगे थे।

अमृतपाल सिंह का चुनाव परिणाम

पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत मार्च 2023 को गिरफ्तार किया गया था। बाद में असम के डिब्रूगढ़ जेल में भेज दिया गया। जेल में रहते हुए अमृतपाल सिंह ने मई 2024 से खडूर साहिब सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लोकसभा चुनाव लड़ा। लोकसभा चुनाव 2024 में अमृतपाल को कुल 404,430 वोट और उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के कुलबीर जीरा को 207,310 वोट मिले।

197,120 वोटों से जीत दर्ज कर सांसद बनने के बाद अमृतपाल को सांसद के रूप में शपथ लेने के लिए 4 दिन की पैरोल दी गई थी। 18वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में 5 जुलाई 2024 को शपथ लेने के लिए वे कड़ी पुलिस सुरक्षा में डिब्रूगढ़ से नई दिल्ली पहुंचे थे।

शेख अब्दुल राशिद कौन हैं?

इंजीनियर रशीद के नाम से मशहूर शेख अब्दुल रशीद का जन्म 19 अगस्त 1967 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के मवार लंगेट में हुआ। शेख अब्दुल पढ़ाई के दौरान ही कश्मीरी अलगाववादी राजनीति में सक्रिय हो गए थे। साल 1978 में अब्दुल गनी के नेतृत्व वाली पीपुल्स कॉन्फ्रेंस ज्वाइन की और 1987 में पीपुल्स कॉन्फ्रेंस मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट से जुड़े।

राशिद ने 1988 में विज्ञान स्नातक की डिग्री प्राप्त की। सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया और राज्य सरकार द्वारा संचालित जम्मू और कश्मीर परियोजना निर्माण निगम में एक दशक से अधिक समय तक इंजीनियर के रूप में काम किया। शेख अब्दुल राशिद ने साल 2008 में लंगेट विधानसभा सीट से निर्दलीय जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव लड़ा और पहली बार विधायक बने। साल 2014 में भी जीत दर्ज की।

शेख अब्दुल राशिद का चुनाव परिणाम

आतंकी फंडिंग के आरोपों में शेख अब्दुल राशिद को जेल जाना पड़ा। जेल में रहते लोकसभा चुनाव 2024 में बारामूला सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरा और जम्मू-कश्मीर के मौजूद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को 204,142 वोटों से हराया। बारामूला लोकसभा चुनाव 2024 में शेख अब्दुल राशिद ने कुल 472,481 वोट और जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) के उमर अब्दुल्ला को 268,339 वोट मिले थे।

 

 

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