एचआरटीसी ड्राइवर का ‘छाता चलाते बस’ वीडियो बना विधानसभा मुद्दा

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जर्जर बसों पर उठे सवाल, विधायक डॉ. जनक राज ने कार्रवाई वापसी की मांग की

भरमौर में बसों की कमी से बढ़ी परेशानी, रिपोर्ट तलब

एएम नाथ। शिमला :  हिमाचल प्रदेश में हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (एचआरटीसी) के एक ड्राइवर द्वारा बारिश के दौरान छाता लगाकर बस चलाने का वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला विधानसभा तक पहुंच गया है। सोमवार को शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए डॉ. जनक राज ने ड्राइवर के खिलाफ की गई कार्रवाई को अनुचित बताया और उसे तुरंत वापस लेने की मांग की।
डॉ. जनक राज ने सदन में कहा कि यह घटना ड्राइवर की लापरवाही नहीं, बल्कि एचआरटीसी की बसों की खराब स्थिति का जीता-जागता उदाहरण है। उन्होंने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र भरमौर में कई बसें जर्जर हालत में सड़कों पर दौड़ रही हैं। बारिश के दौरान बसों की छत से पानी टपकना आम समस्या बन चुकी है, जिससे चालक और यात्रियों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसी ही स्थिति में संबंधित ड्राइवर को मजबूरी में छाता लगाकर बस चलानी पड़ी।
उन्होंने यह भी बताया कि एक यात्री ने इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद एचआरटीसी प्रशासन ने ड्राइवर को नोटिस जारी किया, जिसकी विधायक ने कड़ी आलोचना की। उनका कहना था कि “ड्राइवर को दंडित करना अन्यायपूर्ण है, जबकि वास्तविक जिम्मेदारी मैकेनिकल विंग की है, जिसने खराब बस को संचालन के लिए भेजा।”
इस दौरान विधायक ने भरमौर क्षेत्र में बसों की भारी कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि संसाधनों की कमी के चलते लगभग 12 बस रूट बंद हो चुके हैं। इससे दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन इलाकों में निजी परिवहन की सुविधा भी लगभग न के बराबर है, जिससे लोग पूरी तरह सरकारी बस सेवा पर निर्भर हैं।
डॉ. जनक राज ने सरकार से मांग की कि घाटे के बावजूद इन क्षेत्रों में बस सेवाएं बहाल की जाएं और अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि जनता की सुविधा और कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
वहीं, विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने इस मामले को गंभीर बताते हुए विधानसभा सचिवालय को निर्देश दिए हैं कि ड्राइवर के खिलाफ कार्रवाई और एचआरटीसी बसों की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए। यह घटना राज्य की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

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