कूड़े के ढेरों पर भोजन तलाशने को मजबूर गौवंश, प्लास्टिक खाकर मौत के मुंह में जा रही गौमाता  — प्रशासन तुरंत करे कार्रवाई: राजबीर सिंह भारतीय, पुनीत महाजन, नरेंद्र जेतक

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मनीमाजरा (चंडीगढ़)।  चंडीगढ़ में गौवंश की दयनीय स्थिति एक बार फिर चिंता का विषय बन गई है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में गायों और अन्य गौवंश को खुले में पड़े कूड़े के ढेरों पर भोजन तलाशते देखा जा रहा है। कूड़े में मौजूद प्लास्टिक, पॉलीथीन तथा अन्य हानिकारक पदार्थों को खाते हुए गौवंश के दृश्य न केवल पशु कल्याण पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और स्वच्छता प्रबंधन की भी पोल खोलते हैं।


मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय, भारतीय एकता मंच (पंजीकृत) के जनरल सेक्रेटरी एवं संस्थापक पुनीत महाजन तथा अध्यक्ष नरेंद्र जेतक ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए नगर निगम चंडीगढ़, प्रशासन और पशुपालन विभाग से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और उसके संरक्षण के लिए सरकारें विभिन्न योजनाएं संचालित करती हैं। गौशालाओं के संचालन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद यदि गौवंश सड़कों और कूड़े के ढेरों पर भोजन खोजने को मजबूर है, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
नेताओं ने कहा कि प्लास्टिक और कचरा खाने से गौवंश गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहा है, जिससे उनकी जान पर भी खतरा मंडराता है। हाल ही में विभिन्न स्थानों पर गौवंश की मौत की घटनाओं ने इस मुद्दे को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। यह केवल पशु संरक्षण का मामला नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा विषय है।
राजबीर सिंह भारतीय ने सवाल उठाया कि यदि प्रशासन गौवंश की सुरक्षा और देखभाल का दावा करता है, तो फिर शहर में खुलेआम घूम रहे पशु कूड़े के ढेरों पर प्लास्टिक खाने को क्यों मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि जब खुले में कूड़ा फेंकने पर जुर्माने का प्रावधान है, तो ऐसी परिस्थितियों के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
पुनीत महाजन ने कहा कि गौमाता हमारे देश की सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं। उनकी उचित देखभाल और संरक्षण प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि शहर में घूम रहे गौवंश को सुरक्षित रूप से गौशालाओं तक पहुंचाया जाए तथा उनकी उचित सेवा और भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि आवारा पशुओं के सड़कों पर घूमने से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। कई बार दिन और रात के समय पशु अचानक वाहनों के सामने आ जाते हैं, जिससे गंभीर सड़क हादसे हो सकते हैं। अंधेरे में यह खतरा और भी बढ़ जाता है। इसलिए गौवंश की सुरक्षा के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी इस समस्या का समाधान आवश्यक है।
राजबीर सिंह भारतीय, पुनीत महाजन और नरेंद्र जेतक ने प्रशासन से मांग की कि शहर में खुले में घूम रहे गौवंश को तत्काल सुरक्षित गौशालाओं में पहुंचाया जाए, कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए, खुले में पड़े कूड़े के ढेरों को समाप्त किया जाए तथा पशुपालन विभाग द्वारा नियमित निगरानी और बचाव अभियान चलाया जाए। साथ ही गौवंश के लिए सुरक्षित भोजन और संरक्षण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि गाय प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों का प्रशासन से सीधा सवाल है कि आखिर कब तक गौमाता कूड़े के ढेरों पर प्लास्टिक और अन्य हानिकारक वस्तुएं खाने को मजबूर रहेंगी। चंडीगढ़ ट्राइसिटी में हर जगह यही हाल है पंचकूला ,मोहाली ,खरड़ हरियाणा और पंजाब के उच्च अधिकारियों से भी निवेदन है कि उनकी तरफ भी ध्यान देना चाहिए आवारा पशुओं को एक जगह बनाई जाए जहां पर इनको रखा जाए और गौ माता को गौशाला में रखा जाए

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