खाली होने वाले परिसर का इस्तेमाल अस्पताल सेवाओं के विस्तार के लिए ही होगा
आईजीएमसी में गायनी विंग के लिए कम जगह पर हाईकोर्ट ने मांगा नया हलफनामा
एएम नाथ। शिमला : राजधानी शिमला स्थित राज्य स्तरीय कमला नेहरू मातृ एवं शिशु कल्याण अस्पताल (केएनएच) के खाली होने वाले परिसर में विधायकों के आवास नहीं बनाए जाएंगे। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष स्पष्ट किया है कि अस्पताल परिसर में विधायकों के आवास बनाने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं है। सरकार के इस बयान को हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड में ले लिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि खाली होने वाले परिसर का उपयोग अस्पताल की सेवाओं के विस्तार के लिए ही किया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने यह आदेश पूर्व मेयर संजय चौहान की पत्नी एवं माकपा नेता फालमा चौहान की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। मामले में प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य सचिव तथा आईजीएमसी शिमला के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रीता मित्तल ने अपने-अपने हलफनामे अदालत के समक्ष पेश किए।
स्वास्थ्य सचिव ने हलफनामे में कहा कि केएनएच में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं लगातार जारी रहेंगी। उन्होंने बताया कि अस्पताल का निर्माण 16.09 बीघा भूमि पर 18,564.25 वर्ग मीटर क्षेत्र में किया गया है। वर्ष 2019 में इसके निर्माण पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। सरकार ने स्पष्ट किया कि अस्पताल परिसर में विधायकों के आवास बनाने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं है।
वहीं, डॉ. रीता मित्तल के हलफनामे के अनुसार केएनएच के गायनी विंग के पास 1,600.95 वर्ग मीटर क्षेत्र उपलब्ध है, जबकि आईजीएमसी शिमला में इस विंग के लिए 1,329.55 वर्ग मीटर जगह ही आवंटित है। इसमें करीब 60.90 वर्ग मीटर क्षेत्र में अभी निर्माण कार्य चल रहा है।
खंडपीठ ने आईजीएमसी में गायनी विंग के लिए उपलब्ध जगह को केएनएच की तुलना में कम पाया। सरकार ने अदालत को बताया कि चमियाणा में सुपर स्पेशलिटी विभागों के स्थानांतरित होने के बाद अस्पताल के लिए अतिरिक्त जगह चिन्हित कर आवंटित की जाएगी। हाईकोर्ट ने इस संबंध में सरकार को नया हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर को होगी।
