श्री गुरु रविदास जी के तपोस्थल श्री खुरालगढ़ साहिब में श्री गुरु रविदास जी की 649वीं प्रकाशोतस्व पर समागम का किया आयोजन
गढ़शंकर। श्री गुरु रविदास जी के तपोस्थल श्री खुरालगढ़ साहिब में श्री गुरु रविदास जी की 649वीं प्रकाशोतस्व पर समागम का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों की संगत ने पहुँच कर श्री गुरु रविदास जी के समक्ष नतमस्तक होकर गुरु जी का आशीर्वाद लिया और गुरु जी की बाणी सरवण की। समागम में श्री अखंड पाठ साहिब के पाठ के भोग के बाद कीर्तन करते हुए श्री गुरु रविदास जी के तपोस्थल श्री खुरालगढ़ साहिब के मुख्य सेवादार बाबा केवल सिंह ने श्री गुरु रविदास जी के जीवन दर्शन और उपदेशों के बारे में विस्थार से बताते हुए गुरु रविदास जी का सबसे प्रमुख संदेश आंतरिक शुद्धता था।
उन्होंने सिखाया कि यदि आपका मन पवित्र है, तो ईश्वर आपके पास ही है। बाहरी आडंबरों और तीर्थयात्राओं के बजाय अपने भीतर झांकने और हृदय को साफ रखने पर उन्होंने जोर दिया। उन्हीनों कहा कि गुरु जी ने एक ऐसे समाज का सपना देखा जिसे उन्होंने ‘बेगमपुरा’ (बिना दुख वाला शहर) कहा। गुरु जी ने समाज में व्याप्त ऊंच-नीच और छुआछूत का कड़ा विरोध किया।
गुरु जी का मानना था कि सभी मनुष्य एक ही ईश्वर की संतान हैं और सबको समान अधिकार मिलने चाहिए। उन्हीनों कहा की आज के समय में गुरु जी के विचार हमें आपसी भाईचारे, शांति और निस्वार्थ सेवा का मार्ग दिखाते हैं। गुरु जी का जीवन हमें सिखाता है कि विनम्रता और भक्ति के साथ रहकर ही सच्ची मुक्ति संभव है। इस दौरान गुरु घर रहे माता कलशा यात्री भवन के चल रहे निर्माण के लिए बीआर माही नंगल ने दो लाख, सुखमन यूएसए ने पचास हजार, हरविंदरजीत मल्ल ने एक लाख , हरमन सिंह मंडियाल ने दो लाख और लक्ष्मी पाल दिल्ली ने एक लाख भेंट किए। समागम के अंत में बिभिन्न जगहों से आई हुई शख्सियतों का सम्मान किया गया। इस दौरान इस समय गुरु का अटूट लंगर चलता रहा। समागम दौरान श्री गुरु रविदास जी के तपोस्थल श्री खुरालगढ़ साहिब के मुख्य सेवादार बाबा केवल सिंह के इलावा हेड ग्रंथी भाई नरेश सिंह, सुखदेव सिंह, चेयरमैन कुलव्रण सिंह , मखन सिंह वाहिदपुरी, जीत सिंह बगवाईं , गुरमेज सिंह पूर्व सरपंच रोशन लाल,आल इंडिया जाट महासभा, पंजाब के जनरल सेक्रेटरी अजायब सिंह बोपाराय , विन्दर सिंह ,सतपाल, विशाल, बालकिशन, साहिल ,अरुण कुमार, गुरमुख, हरमन, गोरू गढ़शंकर, राम सिंह बस्सी आदि मौजूद थे।
