जब बुनियादी इलाज नहीं, तो महंगी तकनीक किसके लिए : डॉ. जनक राज : रोबोटिक सर्जरी पर उठे सवाल

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विधायक डॉ. जनक राज ने सरकार से पूछा प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में आज भी डॉक्टरों की कमी

एएम नाथ। चम्बा : प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। भरमौर के विधायक डॉ. जनक राज ने सरकार से सवाल करते हुए कहा है कि जब गरीब मरीजों को बुनियादी इलाज तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा और अस्पतालों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, तो फिर महंगी तकनीक जैसे रोबोटिक सर्जरी का लाभ आखिर किसे मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में नई तकनीक लाना स्वागत योग्य है, लेकिन उससे पहले आम जनता को जरूरी और सुलभ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
डॉ. जनक राज ने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में आज भी डॉक्टरों की कमी है, आवश्यक उपकरणों का अभाव है और कई जगहों पर मरीजों को दवाइयों तक के लिए भटकना पड़ता है। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के मरीजों की स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक है, जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त स्टाफ और संसाधन नहीं हैं। ऐसे हालात में रोबोटिक सर्जरी जैसी अत्याधुनिक और महंगी तकनीक लाने का फैसला आम लोगों की जरूरतों से दूर दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को पहले स्वास्थ्य व्यवस्था की बुनियाद मजबूत करनी चाहिए। यदि अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, दवाइयां और बुनियादी जांच सुविधाएं उपलब्ध होंगी तभी स्वास्थ्य सेवाओं का सही मायनों में लाभ जनता तक पहुंच पाएगा। अन्यथा अत्याधुनिक तकनीक का फायदा केवल सीमित वर्ग तक ही सिमट कर रह जाएगा।
विधायक ने यह भी चेतावनी दी कि कहीं ऐसा न हो कि स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के नाम पर उठाए गए कदम “कोबरा इफेक्ट” की तरह उल्टा असर डाल दें। उन्होंने कहा कि कई बार नीतियां अच्छे इरादों से बनाई जाती हैं, लेकिन यदि जमीनी हकीकत को ध्यान में रखकर योजना नहीं बनाई गई तो उसका परिणाम उल्टा भी हो सकता है। इससे जनता की परेशानी कम होने के बजाय और बढ़ सकती है।
डॉ. जनक राज के अनुसार यदि सरकार अत्याधुनिक तकनीक पर भारी खर्च करती है, लेकिन अस्पतालों की मूलभूत जरूरतों को नजरअंदाज करती है, तो इससे स्वास्थ्य सेवाओं में असमानता बढ़ सकती है। गरीब और ग्रामीण मरीजों के लिए सामान्य इलाज भी मुश्किल हो जाएगा, जबकि महंगी तकनीक का इस्तेमाल केवल बड़े शहरों या चुनिंदा अस्पतालों तक सीमित रह जाएगा।
उन्होंने सरकार से मांग की कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट खर्च करते समय प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया जाए। सबसे पहले अस्पतालों में बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के खाली पदों को भरा जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जाए। इसके बाद ही महंगी और अत्याधुनिक तकनीकों को लागू करने पर विचार किया जाना चाहिए।
विधायक ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य हर नागरिक को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना होना चाहिए। यदि नीतियां इस मूल उद्देश्य से भटक जाती हैं, तो उनका फायदा जनता तक नहीं पहुंच पाएगा। इसलिए सरकार को स्वास्थ्य क्षेत्र में संतुलित और व्यावहारिक नीति अपनाने की जरूरत है, ताकि नई तकनीक के साथ-साथ आम मरीजों की बुनियादी जरूरतों का भी ध्यान रखा जा सके।

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