जोगिंद्रा बैंक की पदोन्नतियों पर सवाल: NABARD से आरसीएस और प्रबंधन की जांच की मांग

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विवादित DPC और लंबित एफआईआर के बीच पदोन्नति का आरोप, JCCB प्रबंधन घेरे में

जोगिंद्रा बैंक में भ्रष्टाचार और संरक्षणवाद के आरोप, एमडी पंकज सूद की भूमिका पर भी उठे सवाल

एएम नाथ। शिमला/सोलन : जोगिंद्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (JCCB), सोलन में कथित वित्तीय अनियमितताओं, विवादित पदोन्नतियों और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने NABARD, मुंबई के मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) को विस्तृत शिकायत भेजकर रजिस्ट्रार सहकारी सभाएं (RCS), हिमाचल प्रदेश तथा बैंक प्रबंधन की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
शिकायत के अनुसार वर्ष 2022-23 में आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अधिवक्ता शर्मा ने निशा ठाकुर की ओर से 14 जनवरी 2026 को आरसीएस शिमला को कानूनी नोटिस भेजकर पदोन्नति प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसके बाद 16 जनवरी और 18 मार्च 2026 को NABARD सहित विभिन्न सक्षम प्राधिकारियों को भी शिकायतें भेजी गईं। आरोप है कि इन शिकायतों और कानूनी नोटिसों पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और न ही कोई उत्तर प्रदान किया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बैंक के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए पदोन्नति प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। इनमें एजीएम राम पाल, कुलदीप सिंह, हरीश शर्मा तथा सीनियर मैनेजर गुरमीत सिंह सहित अन्य अधिकारियों के नाम शामिल हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन अधिकारियों के विरुद्ध विभिन्न शिकायतें, एफआईआर और सतर्कता जांच लंबित होने के बावजूद उन्हें संवेदनशील पदों पर बनाए रखा गया तथा पदोन्नति लाभ देने की प्रक्रिया जारी है।
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि एफआईआर संख्या 45/2019 और 29/2023 में राम पाल के विरुद्ध आपराधिक मामले लंबित हैं और वह जमानत पर है। वहीं राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की एफआईआर संख्या 00003/2025 में कुलदीप सिंह, राम पाल और गुरमीत सिंह सहित अन्य व्यक्तियों के नाम सामने आने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच लंबित होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों को प्रशासनिक संरक्षण दिया जा रहा है।
अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने बैंक के प्रबंध निदेशक पंकज सूद की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि योग्यता और वरिष्ठता के बजाय पक्षपातपूर्ण नीति अपनाकर कुछ अधिकारियों को लाभ पहुंचाया गया, जबकि कई कर्मचारियों के वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) प्रभावित कर उन्हें पदोन्नति से वंचित किया गया।
शिकायतकर्ता ने NABARD से वर्ष 2022 की डीपीसी सहित पूर्व वर्षों की पदोन्नति प्रक्रियाओं की स्वतंत्र सतर्कता जांच कराने, लंबित शिकायतों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा जिन अधिकारियों के विरुद्ध गंभीर आरोप, एफआईआर या सतर्कता जांच लंबित हैं, उन्हें जांच पूरी होने तक पदोन्नति लाभ न देने की मांग की है। फिलहाल मामले में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और अब निगाहें NABARD तथा अन्य नियामक संस्थाओं की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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