बीबीएन, 16 अप्रैल (तारा) : बद्दी नगर के पलाखंवाला में आयोजित श्री मदभागवत कथा के पांचवे दिन वीरवार को प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कथावाचक आचार्य 108 साध्वी ऋषि गिरी जी महाराज ने श्री कृष्ण व रुक्मिणी विवाह का वर्णन, द्वारिका पूरी धाम के बारे विस्तार से बताया साध्वी ऋषि महाराज ने बताया कि श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह प्रेम और अटूट भक्ति का एक दिव्य उदाहरण है, जहाँ विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को बिना देखे ही अपना पति मान लिया था।
उनके भाई रुकमी के विरोध और शिशुपाल के साथ जबरन विवाह तय करने पर, रुक्मिणी ने कृष्ण को संदेश भेजकर बुलावा भेजा। श्रीकृष्ण ने भयंकर युद्ध में शिशुपाल व रुक्मी को हराकर, रुक्मिणी का हरण (प्रेम विवाह) कर भव्य तरीके से द्वारका में उनसे विवाह किया।
रुक्मिणी विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थीं।
श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी के आग्रह पर विवाह के दिन उनका हरण किया।
विवाह स्थल के बारे पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गुजरात का माधवपुर (घेड) कृष्ण और रुक्मिणी का विवाह स्थल माना जाता है, जहाँ आज भी उत्सव मनाया जाता है। उन्होंने बताया
कि देवी स्वरूप: रुक्मिणी को लक्ष्मीजी का अवतार माना जाता है।
हरित करने के बाद, श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी को द्वारका लाया, जहाँ पुरे शहर को सजाया गया और सभी देवी-देवताओं व ऋषि-मुनियों की उपस्थिति में दोनों का विधिपूर्वक विवाह संपन्न हुआ। इस अवसर पर विवाह की झांकी भी निकाली गई।
इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष अच्छर पाल कौशल, दून के पूर्व विधायक परमजीत सिंह पम्मी, राम रतन चौधरी, वीरेंद्र चौधरी, नवीन शर्मा, जोगिंदर ठाकुर, दिनेश शर्मा, गिरधारी लाल कश्यप, कृषि देवी, सुशीला, उर्मिला, सुदर्शन, प्रोमिला, कार्तिक कौशल, सोनिया, सुमन, भागो देवी, कांता, सोनाली, प्रेमलता, रवि, मोहन लाल, सतीश, सुनीता, सुलोचना,सुदेश, चंचल, सोनू देवी, कौशल्या, सुरिंदरा, अनुराधा, मनोहर सिंह, भजन सिंह, सिमरन, प्रियंका, हरीश, दीपक , दिलबाग, हरबंस, रमेश, सोहन लाल, कमल चंद, बुध राम,आंचल, सूर्यांश, अंशुमन, सीमा, निर्मला, बेबी, रीना, आशा राजपूत, दीपा शर्मा, मीना गुप्ता, राजकुमारी, अशोक व बहुत से गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
