नई दिल्ली/चंडीगढ़, 24 मार्च: चंडीगढ़ नगर निगम में चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) से फंड ट्रांसफर से जुड़ी गंभीर वित्तीय अनियमितताओं को उजागर करते हुए, चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में नियम 377 के तहत बोलते हुए इस मामले की ओर सदन का ध्यान आकर्षित किया है, जो जनता के विश्वास और वित्तीय प्रबंधन को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
तिवारी ने सदन को बताया कि हालिया रिपोर्टों के अनुसार एक आंतरिक जांच में सीएससीएल से नगर निगम को फंड ट्रांसफर के दौरान लगभग 120–125 करोड़ रुपये की अनियमितता सामने आई है। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि ट्रांसफर के बाद निगम के खातों में 18 करोड़ रुपये से अधिक की तीन फर्जी डेबिट एंट्रियां भी सामने आई हैं।
तिवारी ने कहा कि जांच में यह भी सामने आया है कि सीएससीएल के बंद होने से पहले ही धोखाधड़ी वाले लेन-देन किए गए थे, जिनमें नकली फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें और फर्जी बैंक स्टेटमेंट शामिल हैं, जो जानबूझकर की गई हेराफेरी का स्पष्ट संकेत देते हैं। उन्होंने कहा कि ये निष्कर्ष वित्तीय निगरानी, आंतरिक नियंत्रण और सत्यापन प्रणाली में गंभीर खामियों की ओर इशारा करते हैं, जो बैंकिंग प्रक्रियाओं और नगर निगम दोनों में मौजूद हैं।
तिवारी ने मामले की गंभीरता पर जोर देते हुए, कहा कि यह प्रकरण सार्वजनिक धन की सुरक्षा, अधिकारियों की जवाबदेही और शहरी स्थानीय निकायों में वित्तीय प्रबंधन की मजबूती को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
तिवारी ने सरकार से अपील की कि सभी लेन-देन का समयबद्ध और स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए। उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल अधिकारियों और संस्थाओं की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तकनीक आधारित सत्यापन और ऑडिट प्रणालियों सहित मजबूत सुरक्षा उपाय तुरंत लागू किए जाएं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह मामला जनता के पैसे से जुड़ा हुआ है और इस पर तुरंत ध्यान देने व सुधारात्मक कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
