तीन ओर से घिरा पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा : ED की एंट्री, घर के टाइल्स में भी छिपा रखे थे राज

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परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. उसकी अग्रिम जमानत याचिका भोपाल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने खारिज कर दी है. गुरुवार ही सौरभ ने अपने वकील राकेश पाराशर के जरिए अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी।
उधर सौरभ के घर और ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की टीम ने छापेमार कार्रवाई की है. ईडी की टीम सुबह भोपाल और ग्वालियर स्थित सौरभ के घर और दफ्तर पहुंच गई. लोकायुक्त और आयकर विभाग के बाद अब ईडी भी इस मामले की जांच में जुट गई है.
सौरभ शर्मा की अग्रिम जमानत के लिए लगाई याचिका पर सुनवाई शुक्रवार को होना थी, लेकिन वकील के अनुरोध पर जज ने आज ही सुनवाई की और सौरभ शर्मा की याचिका को खारिज कर दिया.सौरव शर्मा के वकील ने अदालत में दलील दी थी कि आरोपी लोक सेवक नहीं है, उसे अग्रिम जमानत दी जाए. लेकिन न्यायाधीश ने अपने आदेश में उसे लोक सेवक मानते हुए और अपराध की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया.
ED ने मारे छापे, सौरभ शर्मा फरार :  लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद से ही सौरभ शर्मा फरार चल रहा है. उसके अरेरा कॉलोनी ई-7 स्थित घर और दफ्तर में सीआरपीएफ जवानों के साथ ED की जांच जारी है. घर ओर दफ्तर के बाहर सीआरपीएफ जवान तैनात हैं, जबकि ग्वालियरमें विनय नगर सेक्टर-2 स्थित सौरभ के पैतृक घर पर भी एजेंसी ने दबिश दी है.ED के दर्जनभर अधिकारी मेटल डिटेक्टर सहित कई आधुनिक उपकर के साथ दफ्तर में सर्चिंग कर रहे हैं. लोकायुक्त टीम को इसी दफ्तर से ढाई क्विंटल चांदी बरामद हुई थी.
मेटल डिटेक्टर लेकर पहुंचे अफसर :  सौरभ ने टाइल्स के अंदर चांदी को छुपाकर रखा था, इसलिए ईडी के अफसर मेटल डिटेक्टर लेकर पहुंचे हैं. सौरभ शर्मा मामले में 23 दिसंबर को ईडी की एंट्री हुई थी. ईडी ने सौरभ और उसके सहयोगी चेतन गौर के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस भी दर्ज किया था.जबलपुर में सौरभ शर्मा का ससुराल है। सूत्रों के मुताबिक सौरभ ने अपनी पत्नी दिव्या के भाई शुभम तिवारी के नाम से करोड़ों का निवेश किया है. इसके अलावा दोस्त चेतन सिंह गौर और बहनोई रोहित तिवारी के नाम भी निवेश का पता चला है. ईडी की टीम इसकी पड़ताल में जुटी है।
वकील ने उठाए लोकायुक्त पर सवाल :  सौरभ के वकील राकेश पाराशर ने कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने लोकायुक्त की कार्रवाई को गलत बताया है. एडवोकेट राकेश पाराशर के मुताबिक, सौरभ लोकसेवक नहीं है. इसके बाद भी लोकायुक्त ने उसके घर छापा मारा. यह कार्रवाई पूरी तरह से गलत है. जिस कार में सोना मिला, वो उसके नाम नहीं है. इस सोने से भी उसका कोई लेना-देना नहीं है, जबकि सौरभ के सहयोगी चेतन ने आयकर विभाग की पूछताछ में सोना और पैसा सौरभ का बताया था.
वकीन ने कहा- मुझे नहीं पता सौरभ कहां :  सौरभ शर्मा की ओर से ग्वालियर के वकील राकेश पाराशर पैरवी कर रहे हैं. वकील पाराशर का कहना है, ‘मुझे नहीं पता सौरभ कहां है. याचिकाकर्ता की मां के कहने पर ग्वालियर से भोपाल आया हूं. हम जांच में पूरी तरह से सहयोग करने के लिए तैयार हैं. लोकायुक्त ने पूरी तरह से गलत कार्रवाई की है. क्या धाराएं लगाई हैं यह भी नहीं बताया जा रहा है. जब व्यक्ति शासकीय सेवक नहीं है तो छापे की कार्रवाई भी गलत है।
19 दिसंबर कोई लोकायुक्त ने मारा था छापा :  लोकायुक्त पुलिस ने 19 दिसंबर को पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के घर और दफ्तर पर छापा मार कार्रवाई की थी. लोकायुक्त को 2.95 करोड़ रुपए कैश, करीब दो क्विंटल वजनी चांदी की सिल्लियां, सोने-चांदी के जेवरात और कई प्रापर्टी के दस्तावेज मिले थे.उसी रात को ही भोपाल के मेंडोरी के जंगल में एक कार से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपए कैश मिले थे. ये कार सौरभ के दौस्त चेतन सिंह की थी, जिसके बाद से जब्त सोना और कैश के तार सौरभ से जोड़े जाने लगे. ईडी ने सौरभ पर केस भी दर्ज किया है।
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