तीसरी सरकार आ गई पर इंसाफ नहीं मिला !!

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फरीदकोट : 31 जुलाई :
गोलीकांड की जांच संबंधी मामले में पीडि़त परिवारों तथा मोर्चे द्वारा आज जनतक इक्टठ किया जा रहा है। इस दौरान, फैसला लिया जा सकता है कि पीडि़त परिवारों द्वारा आगे की कार्रवाई कैसे व क्या की जाए। 14 अक्तूबर 2015 में बेअदबी की घटना का विरोध कर रहे दो सिख प्रदर्शनकारियों – सरावां गांव के गुरजीत सिंह तथा फरीदकोट जिले के गांव नियामीवाला के कृष्ण भगवान सिंह की गोलीकांड में मौत हो गई थी तथा कई अन्य जख्मी हो गए थे।
परिवारों की मांग है कि गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वाले लोगों को तथा गोलीकांड में शामिल लोगों को सजा दी जाए।
जांच के लिए समय बढ़ाने की सरकार की मांग
अप्रैल में, प्रदेश सरकार ने 2015 में बहिबल कलां गोली कांड को तर्कपूर्ण परिणाम तक पहुंचाने के लिए तीन महीनों का समय मांगा था, जिसको पीडि़त परिवारों तथा प्रदर्शनकारियों ने स्वीकार कर लिया था।
फिर 10 जुलाई, जब तीन महीने की समय सीमा खत्म हो गई, तो प्रदेश सरकार द्वारा वकीलों की एक टीम ने इस मामले में पंजाब तथा हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा दिए आदेशों के बारे में स्पष्टीकरण लेने के लिए और समय मांगा।
इस उपरांत प्रदर्शनकारी दो सप्ताह का और समय देने के लिए राजी हो गए, जो 25 जुलाई को खत्म हो गया।
24 जुलाई को, पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस तथा कोटकपुरा से विधायक एवं विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने मोर्चे में पहुंच कर नेताओं के साथ बातचीत की।
इस दौरान प्रदेश सरकार के वफद द्वारा जांच मुकम्मल करने के लिए 6 महीने और मांगे गए पर गोलीकांड के मुलजिमों को सजाएं दिलाने के लिए बने इंसाफ मोर्चे ने पंजाब सरकार को यह समय देने से इनकार कर दिया। अब परिवार तथा मोर्चा अगली कार्रवाई का फैसला करने के लिए जनतक इक्टठ कर रहे हैं।
केस की स्टेटस रिपोर्ट तलब करने के हो चुके आदेश
12 जुलाई 2022 को फरीदकोट की ट्रायल कोर्ट ने बेअदबी घटनाओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम को आदेश दिए थे कि 15 दिन के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए। एडिशनल सेशन जज राजीव कालड़ा ने 2015 में बहिबल कलां गोलीकांड के बाद मारे गए दो प्रदर्शनकारी गुरजीत सिंह तथा कृष्ण भगवान सिंह संबंधी केस की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिए थे।
पूर्व आईजी परमराज सिंह उमरानंगल तथा पूर्व एसएसपी चरनजीत सिंह शर्मा भी अदालत के समक्ष पेश हुए थे। पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को अदालत द्वारा स्वास्थ्य कारणों करके अदालत में पेशी से छोट है।

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