टीचर्स से अपने हक के लिए लड़ाई जारी रखने की अपील की गई
गढ़शंकर 14, फरवरी: सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के फैसले के मुताबिक, 2010 से पहले पैदा हुए टीचर्स की नौकरी में बने रहने और प्रमोशन के लिए टेट को ज़बरदस्ती लागू करने को कैंसल कर दिया गया है। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के नेता मुकेश कुमार, सुखदेव डानसीवाल और ज्ञान चंद नूरपुरबेदी की अगुआई में गढ़शंकर के काफी संख्या में टीचर्स गांधी पार्क, गढ़शंकर में इकट्ठा हुए और इस फैसले का टीचर्स पर पड़ रहे असर को खत्म करने के लिए पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना के ज़रिए भारत के प्रधानमंत्री को मांग पत्र भेजा। इस समय विनय कुमार, जरनैल सिंह, प्रदीप सिंह, मनजीत सिंह बंगा, जसविंदर सिंह, बलविंदर खानपुर, मनजीत सिंह, विनोद कुमार रमेश मलकोवाल, मैडम सारा सिद्धू मनजीत कौर, गुरबख्श कौर, मैडम तृप्ति, मैडम नीनू गुलाटी, मैडम अमनदीप वालिया ने कहा कि अध्यापक शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं। अगर उनकी नौकरी की सुरक्षा और सेवा शर्तें अस्थिर रहीं तो इसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ेगा। मौजूदा हालात में उन्हें अनिश्चितता और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए नेताओं ने मांग की है कि देश भर के अध्यापकों के हित में उचित कदम उठाते हुए संसद में कानून में जरूरी बदलाव करने के लिए उपयुक्त बिल लाया जाए और इस फैसले को रद्द या अध्यापकों के हक में संशोधित किया जाए, ताकि अध्यापकों के अधिकार और रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। अगर सरकार की तरफ से इस संबंध में ठोस कदम न उठाए गए तो देश भर के अध्यापक संघर्ष करने को मजबूर होंगे। यह मांग पत्र देते समय मैडम विनय गुप्ता, ज्योति खुराना, केवल कौर, कांता रानी, अनीता रानी, हरजिंदर कौर, किरण बाला, बलजीत सिंह, संजीव कुमार, नरिंदर कुमार, राजदीप सिंह, हंस राज गरशंकर और राजिंदर सिंह आदि मौजूद थे। आखिर में डीटीएफ नेताओं ने सभी टीचरों से एकजुट होकर संघर्ष का मुद्दा उठाने की अपील की।
