लोकसभा में उठा हिमालयी राज्यों का मुद्दा, केंद्र ने गिनाईं पर्यावरण संरक्षण की पहलें
वायु, जल और जलवायु संरक्षण के लिए कई योजनाएं लागू, हिमाचल को करोड़ों की सहायता
एएम नाथ। शिमला : शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद सुरेश कश्यप द्वारा लोकसभा में हिमालयी एवं पहाड़ी राज्यों, विशेषकर हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, नदी पुनर्जीवन और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर पूछे गए प्रश्न के जवाब में केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने बताया कि हिमालयी राज्यों के संवेदनशील पर्यावरण की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार बहुआयामी और दीर्घकालिक कार्ययोजना पर प्रभावी ढंग से काम कर रही है।
सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों में पर्यावरण संरक्षण केवल प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटन, कृषि, बागवानी और लाखों लोगों की आजीविका से भी जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से यह प्रश्न लोकसभा में उठाया गया, ताकि प्रदेश को मिल रही पर्यावरणीय योजनाओं और सहायता की जानकारी सामने आ सके।
केंद्र सरकार ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन के विशेष प्रावधान लागू किए गए हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत हिमाचल के बद्दी, दमताल, काला अंब, नालागढ़, पांवटा साहिब, परवाणू और सुंदरनगर सहित सात गैर-प्राप्ति शहरों में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए विशेष कार्ययोजनाएं लागू हैं। वर्ष 2019-20 से 2025-26 तक इन शहरों के लिए 25.73 करोड़ रुपये का प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन अनुदान भी जारी किया गया है।
केंद्र ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के तहत हिमाचल में 250 स्थानों पर जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जा रही है। साथ ही भूस्खलन प्रबंधन, सीवेज उपचार, जलग्रहण क्षेत्र विकास, वन एवं वन्यजीव संरक्षण, मलबा प्रबंधन और बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली जैसे पर्यावरणीय उपाय विभिन्न विकास परियोजनाओं में शामिल किए गए हैं। सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए हिमालयी राज्यों के लिए वैज्ञानिक एवं दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है।
