नई दिल्ली : नीत पेपर लीक को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन अब सियासी मोड़ ले चुका है. मंगलवार यानी 21 जुलाई को यह मामला जंतर-मंतर से आगे बढ़कर प्रधानमंत्री आवास तक पहुंच गया. 20 जुलाई को छात्रों के संसद मार्च के दौरान हुए लाठीचार्ज के विरोध में कांग्रेस नेता राहुल गांधी दो मुख्यमंत्रियों और कई सांसदों के साथ पीएम आवास (7 लोक कल्याण मार्ग) के पास धरने पर बैठ गए।
राहुल गांधी का यह धरना दो घंटे से ज्यादा समय तक चला. इस दौरान सरकार और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी उन्हें समझाने की कोशिश करते नजर आए।
राहुल गांधी का पीएम आवास के पास धरना इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह इलाका सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है. इसके अलावा इस समय संसद का सत्र चल रहा है और पीएम आवास के आसपास के इलाके में बीएनएस की धारा-163 लागू है. ऐसे में सवाल उठा कि राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं को वहां तक पहुंचने की अनुमति कैसे मिली।
कैसे पीएम आवास तक पहुंचे राहुल गांधी?
सूत्रों के मुताबिक, संसद की कार्यवाही स्थगित होने के बाद राहुल गांधी मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पहुंचे थे. उस दिन खरगे का जन्मदिन भी था, लेकिन उन्होंने जन्मदिन मनाने से इनकार कर दिया. छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में उन्होंने केक काटने से मना कर दिया।
राहुल गांधी का पीएम आवास के पास धरना दो कारणों से काफी अहम माना जा रहा है..
- पीएम आवास को सुरक्षा के दृष्टिकोण से काफी अहम माना जाता है.
- अभी संसद का सत्र चल रहा है. उस पूरे इलाके में बीएनएस की धारा-163 लागू है।
- इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने खरगे से प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए चलने को कहा. सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी के साथ दो मुख्यमंत्री, केरल के वीडी सतीशन और कर्नाटक के डीके शिवकुमार और कई सांसद मार्च करते हुए पीएम आवास की ओर निकल गए. बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने इस कार्यक्रम की जानकारी ज्यादा लोगों को नहीं दी थी. मीडिया को भी पहले से इसकी जानकारी नहीं दी गई, इसलिए यह अचानक हुआ प्रदर्शन माना गया।राहुल गांधी की क्या मांग है?कांग्रेस ने NEET पेपर लीक मामले को छात्रों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए संसद में इस पर चर्चा की मांग की है. कांग्रेस महासचिव और मीडिया प्रभारी जयराम रमेश के मुताबिक, प्रधानमंत्री को दोनों सदनों में इस मुद्दे पर बयान देना चाहिए. कांग्रेस NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।इसके अलावा छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की जा रही है. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार संसद में इस मामले पर चर्चा नहीं करना चाह रही है. उनकी मांग है कि NEET पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर संसद में बहस हो।
धरने में कौन-कौन नेता शामिल हुए?
पीएम आवास के बाहर हुए इस धरने में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, केरल और कर्नाटक के मुख्यमंत्री, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत कई बड़े नेता शामिल हुए।
AAP का राहुल गांधी पर हमला
इधर, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी के धरना-प्रदर्शन पर आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है. आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा- CJP के धरने को कमजोर करने के लिए पीएम मोदी ने राहुल गांधी को अपने आवास पर धरने पर बिठा दिया. वहीं कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं से मिलने आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल जंतर-मंतर पहुंचे. वरिष्ठ सांसद शरद पवार भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे
- आंदोलन में बदला राजनीतिक समीकरणअब तक NEET पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को मुख्य रूप से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) लीड कर रही थी. इसे आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी का समर्थन मिला था. अब राहुल गांधी के पीएम आवास के बाहर धरने के बाद कांग्रेस भी इस मुद्दे पर सक्रिय रूप से सामने आ गई है. इस पूरे घटनाक्रम के बाद NEET पेपर लीक का मुद्दा सिर्फ परीक्षा व्यवस्था और छात्रों की मांगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बन गया है।
