पाकिस्तान में गुरुद्वारा तोड़ना निंदनीय है …केजरीवाल-मान सरकार की चुप्पी सिख मर्यादा विरोधी का सबूतः भाजपा

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नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और ट्रांस-यमुना एरिया डेवलपमेंट बोर्ड के अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने विगत 24-25 जून की रात में पाकिस्तान के फरूखाबाद में एक हैरिटेज श्री गुरू सिंह सभा गुरुद्वारे को तोड़े जाने की कड़ी निंदा करते हुए पंजाब सरकार पर निशाना साधा।

दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि यह कोई एकाकी घटना नही है, पाकिस्तान में इसी तरह सिख, हिन्दू, ईसाई अल्पसंख्यकों और उनके धर्म स्थलों पर हमले होना सामान्य बात है।

हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार लगातार सिखों एवं अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को सुरक्षा का भाव देने के लिए काम कर रही है तो वहीं पाकिस्तान की सरकार अल्पसंख्यकों को अतिवादियों के भरोसे छोड़े हुए है और उसी के साथ पाकिस्तान लगातार आतंकवाद की शरणस्थली बनी हुई है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पाकिस्तान में श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारे को तोड़े जाने के एक सप्ताह बाद भी पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार की उस पर चुप्पी देशवासियों को स्तब्ध करती है और निंदनीय है।

हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत मान स्वंय सिख मर्यादाओं के हनन के दोषी हैं और अकाल तख्त साहब ने उन्हे सिख पंथ विरोधी घोषित किया हुआ और ऐसे में सरदार भगवंत मान एवं अरविंद केजरीवाल की पाकिस्तान में गुरुद्वारा तोड़े जाने पर चुप्पी उनके सिख मर्यादा विरोधी होने का एक और सबूत है।

ट्रांस-यमुना एरिया डेवलपमेंट बोर्ड के अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि एक तरफ पाकिस्तान दुनिया भर में अल्पसंख्यकों का मसीहा बनने की नौटंकी करता है और उसके अपने ही देश के अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं है।

अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले व्यवहार और उनके धार्मिक स्थलों को गिराए जाने की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए उन्होंने तुरंत पाकिस्तान सरकार को अल्टिमेटम दिया है और गुरुद्वारे को पुनर्निमाण करने की बात कही है। लवली ने कहा कि पाकिस्तान में जो हुआ है वह यूनेस्को के नियम का भी उल्लंघन है क्योंकि यूनेस्को के नियमानुसार जो भी 100 साल पुराने धार्मिक स्थल है उसकी सुरक्षा करना उस देश का पहला कर्तव्य है और अगर किसी धार्मिक स्थल के मूल ढाचे के साथ छेड़छाड़ किया जाता है तो यह यूनेस्को के नियम का उल्लंघन माना जाता है।

उन्होंने कहा कि यह पहली घटना नहीं है जब धार्मिक स्थलों के साथ पाकिस्तान में छेड़छाड़ की गई है बल्कि इससे पहले भी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए ऐसी दुस्साहस पाकिस्तान द्वारा किया जा चुका है।

 

 

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