प्रदेश में भांग की खेती को क़ानूनी तौर पर वैद्य करने की तैयारी में सरकार : कैंसर, मिर्गी, पुराने दर्द में भी प्रभावी, पुराने दर्द में प्रभावी है कैनाबाइडियल : राजस्व मंत्री जगत नेगी

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शिमला : सरकार ने प्रदेश में भांग की खेती को क़ानूनी तौर पर वैद्य करने की तैयारी कर ली है। सरकार द्वारा गठित कमेटी ने इसे लेकर शुक्रवार को सदन में अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए राजस्व मंत्री एवं कमेटी के चेयरमैन जगत नेगी ने कहा कि हिमाचल में इंडस्ट्रियल और औषधीय इस्तेमाल के लिए भांग की नियंत्रित खेती की जा सकती है। उन्होंने कहा कि पहला राज्य उत्तराखंड है, जिसमें भांग की खेती शुरू की है। हिमाचल प्रदेश में भांग का पौधा सभी जिलों में उगता है, मौजूदा समय में नशीली दवाओं के संभावित उपयोग के कारण विभिन्न एजेंसियों द्वारा इस पौधे को नष्ट किया जा रहा है। हालांकि इंडस्ट्रियल भांग की खेती पर्यावरण के लिए खतरनाक नहीं है, क्योंकि इसमें कार्बन की मात्रा कम है। यही नहीं इस पौधे को आवारा पशु, जंगली जानवर भी नष्ट नहीं कर सकते।
औद्योगिक भांग के पौधे को बड़े स्तर पर हिमाचल में उगाया जा सकता है। इस पौधे में पाए जाने वाला सीबीडी (कैनाबाइडियल) कैंसर, मिर्गी, पुराने दर्द में भी प्रभावी है। भांग की खेती से ग्रामीण आर्थिकी को बढ़ावा मिलेगा और इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 10 के तहत औषधीय और दवाइयों में इसके पौधे खेती की जा सकती है और इसके लिए एनडीपीएस में एक्ट में बदलाव किया जा सकता है।
राजस्व मंत्री एवं कमेटी के चेयरमैन जगत नेगी ने कहा कि कमेटी ने हिमाचल के तकरीबन सभी जिलों का दौरा किया है। इन जिलों में पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ इसको लेकर गहन विचार विमर्श किया है। सभी लोगों ने औषधीय और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए भांग की खेती का समर्थन किया है। उन्हीने ने कहा कि औद्योगिक इस्तेमाल होने वाली भांग में नशे की मात्रा न के बराबर है। भांग की खेती की ओर आगे बढ़ना चाहिए। जिस तरह से अफीम की खेती के लिए केंद्र सरकार लाइसेंस देती है, उसी तरह से हिमाचल में भी सर्विलांस और क्लोज एन्वायरमेंट में इसकी खेती हो सकती है। उल्लेखनीय है कि गत विधानसभा के बजट सत्र में मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने इसे लेकर राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। इसके बाद कमेटी ने भांग की खेती करने वाले राज्यों उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और जम्मू का दौरा किया था ।

संसद में वर्ष 1985 में एनडीपीएस एक्ट के तहत परिभाषित किया था : भांग को संसद में वर्ष 1985 में एनडीपीएस एक्ट के तहत परिभाषित किया था, जिसके तहत भांग के पौधे से राल और फूल निकालने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। राज्यों को सामान्य या विशेष आदेश द्वारा, केवल फाइबर या बीज प्राप्त करने या बागवानी उद्देश्यों के लिए भांग की खेती की अनुमति देने का अधिकार है।

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