प्रदेश सरकार ने बढ़ाए फसलों के समर्थन मूल्य, किसानों को मिलेगा लाभ: प्रो. चन्द्र कुमार

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ज्वाली में कृषि विज्ञान केंद्र कांगड़ा का जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
एएम नाथ। ज्वाली,6 अप्रैल। ज्वाली विधानसभा क्षेत्र में आज सोमवार को कृषि विज्ञान केंद्र कांगड़ा द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों के लिए क्षमता निर्माण, आजीविका संवर्धन एवं सतत कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार ने की। कार्यक्रम में क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती और उससे जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं, इसके लाभों तथा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इस अवसर पर कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि हाल ही में प्रस्तुत बजट में प्राकृतिक खेती से तैयार गेहूं की फसल का समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है। इसी प्रकार मक्की का न्यूनतम समर्थन मूल्य 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम तथा हल्दी का समर्थन मूल्य 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा अदरक को भी 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती पशुपालन के बिना संभव नहीं है, इसलिए सरकार किसानों को पशुपालन अपनाने के लिए विशेष रूप से प्रोत्साहित कर रही है। इसी दिशा में गाय के दूध का समर्थन मूल्य 61 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस के दूध का 71 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी।
उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश सरकार द्वारा लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत से ढगवार में अत्याधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इस प्लांट में किसानों से खरीदे गए दूध से विभिन्न डेयरी उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
कृषि मंत्री ने किसानों से आह्वान किया कि वे पारंपरिक रासायनिक खेती से हटकर प्राकृतिक खेती को अपनाएं। उन्होंने कहा कि इससे न केवल भूमि की उर्वरता बनी रहेगी बल्कि किसानों को बेहतर मूल्य भी मिलेगा और उनकी आर्थिकी सुदृढ़ होगी।
इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कुलपति डॉ. अशोक कुमार पण्डा ने अपने संबोधन में कहा कि प्राकृतिक खेती वर्तमान समय की आवश्यकता है, जो न केवल किसानों की लागत को कम करती है बल्कि मिट्टी की सेहत को भी दीर्घकाल तक बनाए रखती है। उन्होंने किसानों से रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने और जैविक एवं प्राकृतिक तरीकों को अपनाने का आग्रह किया।
अतिरिक्त निदेशक कृषि राहुल कटोच ने भी किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि विभाग द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने किसानों से इन योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती के लिए पंजीकरण करवाने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे सरकार सीधे उनसे उपज खरीद सकेगी और उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित किसानों को सब्जियों के पौधे तथा प्राकृतिक खेती से संबंधित पुस्तकें वितरित की गईं। इस अवसर पर कृषि विभाग के अधिकारी, वैज्ञानिक एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर एसडीएम नरेंद्र जरियाल, निदेशक प्रसार डॉ विनोद शर्मा,कुलपति डॉ अशोक कुमार पण्डा,अतिरिक्त निदेशक कृषि राहुल कटोच, आत्मा प्रोजेक्ट निदेशक शशि पाल,कृषि उप निदेशक कुलदीप धीमान,बीडीओ मनोज शर्मा,कांग्रेस प्रवक्ता संसार सिंह संसारी, पूर्व कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष चैन सिंह गुलेरिया सहित विभिन्न विभागीय अधिकारी तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
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