फल खाना स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक : सही समय सही तरीके से खाना भी उतना ही जरूरी ……आयुर्वेद से जानें खाने के सही नियम

by

नई दिल्ली, 18 मार्च । आयुर्वेद में खाने से लेकर निरोगी जीवन जीने के कई नियम बताए गए हैं। आयुर्वेद मनुष्य के शरीर की प्रवृत्ति के हिसाब से आहार जीवनशैली का चयन करता है। बात चाहे आहार की हो या फिर फल की, आयुर्वेद में अलग प्रवृत्ति के अनुसार फल आहार दोनों खाने की सलाह दी जाती है।

 आयुर्वेद से फल खाने के सही नियम के बारे में जानें….. आमतौर पर हम जब मन करता है, तब ही फल का सेवन कर लेते हैं। कुछ लोग फल को छिलकर खाने की बजाय जूस निकालकर पीना पसंद करते हैं, लेकिन क्या ये तरीके शरीर को पूरा पोषण पहुंचा पाते हैं?

आयुर्वेद के अनुसार फल खाना स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है, लेकिन उन्हें सही समय सही तरीके से खाना भी उतना ही जरूरी है। हमेशा मौसमी पके हुए फल चुनें, क्योंकि कच्चे फल शरीर में पित्त बढ़ा सकते हैं। फल खाने का सबसे अच्छा समय भोजन के बीच (सुबह या शाम) माना जाता है, एक समय में एक ही प्रकार का फल खाना बेहतर होता है। सही नियमों के साथ फल खाने से पाचन बेहतर होता है, ऊर्जा मिलती है, शरीर स्वस्थ रहता है।

आने वाले महीनों में आम बाजार में आसानी से मिलने लगेगा। ऐसे में पके हुए फल दोपहर या शाम के वक्त खा सकते हैं क्योंकि पका हुआ आम शरीर को ऊर्जा देता है, जबकि कच्चा फल शरीर में पित्त की वृद्धि करता है। कच्चे आम को चटनी या सब्जी में मिलाकर खाया जा सकता है। केला साल के 12 महीने आराम से बाजार में मिलता है हर घर में इसका सेवन किया जाता है, लेकिन यह जानना जरूरी है कि केले का सेवन किन लोगों को नहीं करना चाहिए। केला शरीर में कफ बढ़ाता है। ऐसे में कफ प्रवृत्ति के लोग सीमित मात्रा में केले का सेवन करें।  वात दोष वाले लोगों के लिए खजूर अंगूर (खट्टे फल) खाना लाभदायक होता है। फलों का सेवन भी सुबह खाली पेट नहीं करना चाहिए। नाश्ता करने के बाद ही फलों का सेवन करें। शाम को सूरज ढलने से पहले तक फलों का सेवन किया जा सकता है।

वहीं कुछ लोग फलों की तुलना में शेक बनाकर पीना पसंद करते हैं, लेकिन फल दूध विरुद्ध आहार हो जाता है, जो शरीर को पोषण नहीं बल्कि बीमारी देता है। इसके साथ ही जूस का सेवन भी शरीर में शुगर की मात्रा को बढ़ाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि फलों का जूस निकालने की वजह से फलों का फाइबर छिलके के रूप में बाहर निकल जाता है बचता है कि फिल्टर रस, जो शरीर को भले ही ताजगी देता है लेकिन पोषण नहीं।

Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
पंजाब

Sanskar and Parental Values Play

Jalandhar/Daljeet Ajnoha/Jan.4 : Family values and sanskar play a decisive role in the grooming and career-building of a child, especially in middle-class families, said Shakuntala Devi during an interaction with senior journalist Sanjiv Kumar....
article-image
हिमाचल प्रदेश

श्री नयना देवी जी मंदिर में 25 जुलाई से 3 अगस्त 2025 तक आयोजित होगा श्रावण अष्टमी मेला : श्रावण अष्टमी मेले के दौरान 500 गृह रक्षक देंगे सेवाएं

बिलासपुर, 15 जुलाई :  श्री नयना देवी जी मंदिर में 25 जुलाई से 3 अगस्त 2025 तक आयोजित होने वाले श्रावण अष्टमी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की अत्यधिक संभावित भीड़ को नियंत्रित करने और...
article-image
पंजाब

8 लाख रुपए रिश्वत लेने के आरोप में विजीलैंस ने इम्परूवमैंट ट्रस्ट के लेखाकार को किया गिरफ़्तार

चंडीगढ़ : पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने शनिवार को अमृतसर इम्परूवमैंट ट्रस्ट (ए.आई.टी.) में लेखाकार के तौर पर तैनात विशाल शर्मा निवासी अमृतसर, को 8 लाख रुपए रिश्वत की माँग करने और लेने के आरोप में...
article-image
पंजाब

नहर के साथ कच्ची पटरी को पक्का करने की मांग  : गांव ऐमा मुगलां से स्कूल तक करीब एक किलोमीटर का टुकड़ा

गढ़शंकर, 7 अगस्त : गढ़शंकर के गांव फतेहपुर खुर्द में सीनियर सेकेंडरी स्कूल होने के चलते विद्यार्थी रायपुर गुज्जरां, कितना, जीवनपुर गुज्जरां, ऐमा मुगलां व अन्य आसपास के गांवों से पढ़ने के लिए आते...
Translate »
error: Content is protected !!