फौजा सिंह ने साबित किया असंभव कुछ भी नहीं, 89 की उम्र में दौड़े पहली बार मैराथन

by

चंडीगढ़ : फौजा सिंह ऐसी शख्सीयत हैं, जिन्होंने रिटायरमेंट के बाद अपना हुनर साबित किया और यह बताया कि अगर आपके अंदर प्रतिभा है, तो कोई भी बाधा उसे बाहर आने से रोक नहीं सकती।

89 साल की उम्र में एक मैराथन रनर के रूप में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी और 100 की उम्र में भी वे मैराथन रनर रहे. 2012 के लंदन ओलंपिक में वे मशाल वाहक बने और हजारों लोगों की प्रेरणा भी बने।

जालंधर के रहने वाले थे फौजा सिंह

भारतीय ब्रिटिश नागरिक फौजा सिंह पंजाब के जालंधर जिले के रहने वाले थे. उनका बचपन जिस तरह का था कोई यह सोच नहीं सकता था कि वे एक धावक यानी रनर बनेंगे. 5 वर्ष की उम्र तक जालंधर काफी कमजोर थे, उनका पैर भी काफी कमजोर था. प्रसिद्ध लेखक खुशवंत सिंह ने अपनी किताब Turbaned Tornado: The Oldest Marathon Runner Fauja Singh में उनके बचपन की इन परेशानियों का जिक्र किया है. किस तरह उन्हें बचपन में चलने में परेशानी थी और किस तरह वे अपनी मानसिक ताकत से एक मैराथन रनर बने।

दुनिया के सबसे बूढ़े मैराथन रनर

फौजा सिंह को दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन रनर की उपाधि मिली हुई है. वे अपने बेटे के साथ लंदन तब गए थे, जब वे काफी सदमे में थे. उनके छोटे बेटे, बेटी और पत्नी की आकस्मिक मौत हो गई थी. इकोनाॅमिक्स टाइम्स में छपी खबर के अनुसार वे रोज उस जगह पर चले जाते थे जहां उनके परिजनों का अंतिम संस्कार हुआ था, अंतत: उनके बेटे जो लंदन में रहते थे, वे फौजा सिंह को अपने साथ ले गए. लंदन में उन्होंने मैराथन दौड़ टीवी पर देखा और यही उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट बना. उन्होंने वहां रनिंग की शुरुआत की और 89 साल की उम्र में मैराथन पहली बार दौड़े. उन्होंने साल 2000 में यह उपलब्धि हासिल की थी और लंदन मैराथन का हिस्सा बने थे. इस रेस को उन्होंने सात घंटे में पूरा किया था.2011 में जब वे 100 के थे, तो उन्होंने टोरंटो वॉटरफ्रंट मैराथन (Toronto Waterfront Marathon) में भाग लिया. इस मैराथन को उन्होंने 8 घंटे और 11 मिनट में पूरा किया था. 100 साल की उम्र में इस मैराथन को पूरा करके वे दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन रनर बने।

अपनी पूरी कमाई को दान में दिया

फौजा सिंह ने अपनी पूरी कमाई को दान में दे दिया. यहां तक कि एडिडास के विज्ञापन से भी उन्हें जो पैसा मिला था, उसे भी उन्होंने जरूरतमंदों के लिए दान दे दिया. उन्होंने गुरुद्वारों को भी काफी दिया. खासकर दानपत्र में वे पैसे देते थे, जो उन्हें मिलता था, उसे वे सीधे दानपेटी में ही डाल देते थे।

 

Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
पंजाब

Special camps to be held

Hoshiarpur/Nov. 22/Daljeet Ajnoha  : Deputy Commissioner-cum-District Election Officer Komal Mittal said that as per the directions of Chief Electoral Officer, Punjab, special camps will be held on 23.11.2024 (Saturday) and 24.11.2024 (Sunday) (except Assembly Constituency...
article-image
हिमाचल प्रदेश

एबीवीपी संगोष्ठी में तीक्ष्ण सूद ने स्वामी विवेकानंद के विचारों से युवाओं को किया प्रेरित”

होशियारपुर/दलजीत अज्नोहा :   राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) होशियारपुर द्वारा जिज्ञासा होशियारपुर के सहयोग से “स्वस्थ शरीर, निर्भीक मन : स्वामी विवेकानंद और युवा सशक्तिकरण में आयुर्वेद की...
article-image
पंजाब

सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल गढ़शंकर में जोनल टूर्नामेंट शुरू

गढ़शंकर : 24 अगस्त : जिला शिक्षा अधिकारी श्री गुरशरण सिंह के निर्देशन में तथा ब्लाक नोडल अधिकारी-कम-प्रिंसिपल मैडम सीमा बुद्धिराजा के कुशल नेतृत्व में सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल गढ़शंकर में जोनल टूर्नामेंट शुरू...
article-image
हिमाचल प्रदेश

अनॉसमेंट के माध्यम से 4 जनवरी तक चलेगा जागरूकता अभियान : शहर के 5 नगर निगम वार्डों समरहिल, बालूगंज, नाभा, टूटीकंडी और फागली में मतदाता सूचियों के अपडेट दावे एवं आपत्तियों के पुनरीक्षण के लिए जागरूकता अभियान जारी

शिमला : जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी ने आज यहां बताया कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा शिमला शहर के 5 नगर निगम ward Summer Hill, बालूगंज नाभा Tutikandi, Phagli मैं...
Translate »
error: Content is protected !!