सीजेपी प्रदर्शन के दौरान पुलिस के गुरुद्वारा परिसर में पहुंचने पर विवाद; सरना बोले- सिख मर्यादा का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं, जिम्मेदारी तय हो
नई दिल्ली, 11 अक्टूबर। शिरोमणि अकाली दल दिल्ली के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान ऐतिहासिक गुरुद्वारा बंगला साहिब परिसर में दिल्ली पुलिस के प्रवेश पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे सिख धार्मिक मर्यादा और परंपराओं के विपरीत बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से मामले की निष्पक्ष जांच करवाने तथा जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
आईएएनएस से बातचीत में सरना ने कहा कि गुरुद्वारा बंगला साहिब आठवें पातशाह श्री गुरु हरकृष्ण साहिब जी से जुड़ा पवित्र ऐतिहासिक स्थल है। ऐसे धार्मिक स्थान पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध का नहीं, बल्कि धार्मिक स्थलों की मर्यादा और परंपराओं की रक्षा का है।
‘पुलिस प्रदर्शनकारियों का पीछा करते हुए गुरुद्वारे पहुंची’
सरना के अनुसार, सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी अशोक रोड की तरफ से गुरुद्वारा परिसर में पहुंचे थे। उन्होंने दिल्ली पुलिस मुख्यालय के उस कथित स्पष्टीकरण को खारिज किया, जिसमें पुलिस के केवल वहां से गुजरने की बात कही गई थी।
सरना ने दावा किया कि उनके पास मौजूद वीडियो में 20 से 25 पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों का पीछा करते हुए गुरुद्वारे तक पहुंचते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए वीडियो की जांच होनी चाहिए और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जानी चाहिए।
‘गुरु घर के दरवाजे सभी के लिए खुले’
सरना ने कहा कि सिख परंपरा में गुरुद्वारे में आने वाले हर व्यक्ति को सम्मान, लंगर और जरूरत पड़ने पर ठहरने की सुविधा देने की भावना रही है। उन्होंने कहा कि यदि कोई प्रदर्शनकारी गुरुद्वारे में शरण लेने पहुंचता है, तो गुरुद्वारा प्रबंधन उसे समझाकर शांतिपूर्वक स्थिति संभाल सकता है।
उनके मुताबिक, पुलिस को गुरुद्वारे के भीतर प्रवेश करने के बजाय परिसर के बाहर उचित व्यवस्था करनी चाहिए थी। यदि किसी व्यक्ति ने कानून का उल्लंघन किया है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन धार्मिक स्थल की मर्यादा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के रुख पर भी उठाए सवाल
परमजीत सिंह सरना ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष की ओर से पुलिस कार्रवाई को उचित ठहराए जाने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कमेटी के नेतृत्व की प्राथमिक जिम्मेदारी गुरुद्वारों की मर्यादा और परंपराओं की रक्षा करना है।
सरना ने आरोप लगाया कि इस मामले में कमेटी के अध्यक्ष का रुख उचित नहीं रहा। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शनकारी गुरुद्वारे में आए थे, तो प्रबंधन को उनसे बातचीत कर स्थिति संभालनी चाहिए थी। ये टिप्पणियां सरना के आरोप और विचार हैं; संबंधित पक्ष का विस्तृत जवाब उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
1955 और 1984 की घटनाओं का किया उल्लेख
सरना ने अपने बयान में 1955 और 1984 की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों पर पुलिस की कार्रवाई का सिख समुदाय के इतिहास और भावनाओं से गहरा संबंध है। उन्होंने इन घटनाओं को याद करते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में प्रशासन को धार्मिक मर्यादाओं के प्रति विशेष संवेदनशीलता बरतनी चाहिए।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से आग्रह किया कि भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि किसी प्रदर्शन या कानून-व्यवस्था की स्थिति में गुरुद्वारों की मर्यादा प्रभावित न हो।
‘धार्मिक स्थलों की परंपराओं की रक्षा जरूरी’
सरना ने कहा कि धार्मिक स्थलों की गरिमा और परंपराओं का सम्मान सभी के लिए जरूरी है, चाहे वह गुरुद्वारा हो, मंदिर हो या मस्जिद। उन्होंने कहा कि इस मामले को किसी सरकार या राजनीतिक दल के पक्ष-विपक्ष के रूप में देखने के बजाय धार्मिक स्वतंत्रता और परंपराओं के सम्मान के नजरिए से देखा जाना चाहिए।
उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच, तथ्यों को स्पष्ट करने और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग दोहराई।
