बाबा बकाला में रखड़ पुनिया पर सजा सियासी मंच, अकाली दल वारिस पंजाब दे का बड़ा ऐलान …..‘बादल परिवार को हराना मुख्य लक्ष्य : मजीठिया ने भी सरकार पर साधा निशाना

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बाबा बकाला। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले रखड़ पुनिया के मौके पर बाबा बकाला में सियासी गतिविधियां तेज हो गईं। मेले के दौरान आयोजित अलग-अलग राजनीतिक कॉन्फ्रेंस में नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपने-अपने एजेंडे और रणनीति सामने रखी।

वारिस पंजाब दे का बड़ा राजनीतिक ऐलान

अकाली दल वारिस पंजाब दे की ओर से आयोजित राजनीतिक कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि पार्टी का मुख्य लक्ष्य बादल परिवार को चुनावी चुनौती देना और पंजाब में अकाली दल वारिस पंजाब दे को मजबूत करना है।

नेताओं ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर पार्टी को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से परेशान है और आने वाले चुनाव में जनता अपना फैसला सुनाएगी।

कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने का संदेश दिया। नेताओं ने कहा कि चुनावी सफलता के लिए जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करना बेहद जरूरी है। इस दौरान बड़ी संख्या में समर्थक और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

मजीठिया ने उठाया कर्मचारियों-पेंशनरों के डीए का मुद्दा

रखड़ पुनिया मेले में पहुंचे शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाब सरकार पर कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) को लेकर तीखा हमला बोला।

मजीठिया ने कहा कि पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनरों को उनका जायज डीए समय पर नहीं मिल रहा, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी और पेंशनर लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार के समक्ष आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा।

उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के हक का पैसा रोकना उनके साथ अन्याय है। महंगाई के लगातार बढ़ने के बीच कर्मचारियों और पेंशनरों को डीए का लाभ समय पर मिलना चाहिए।

‘सरकार कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से ले’

मजीठिया ने पंजाब सरकार से लंबित डीए जारी करने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और जल्द ठोस फैसला लेना चाहिए।

उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव के दौरान कर्मचारियों से बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।

2027 से पहले तेज हुआ अकाली सियासी संघर्ष

बाबा बकाला में रखड़ पुनिया के मौके पर सजे राजनीतिक मंचों से साफ संकेत मिले कि 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर पंजाब में सियासी लामबंदी तेज हो चुकी है। एक तरफ विभिन्न अकाली धड़े अपने संगठन और जनाधार को मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर कर्मचारी, पेंशनर, किसान और अन्य जन मुद्दे राजनीतिक दलों के निशाने पर हैं।

अब देखना होगा कि रखड़ पुनिया के मंच से उठे ये राजनीतिक मुद्दे आने वाले विधानसभा चुनाव में कितना असर डालते हैं और अकाली राजनीति में चल रही खींचतान किस दिशा में जाती है।

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