बैंकों में मंगलवार को हड़ताल क्‍यों है? 2 दिन की छुट्टी के बाद इस स्‍ट्राइक ने बढ़ाई टेंशन

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नई दिल्‍ली : यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह यानी 5-डे वर्क वीक की मांग को लेकर 27 जनवरी को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल से सरकारी बैंकों के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका है।

यह हड़ताल मुख्य श्रम आयुक्त के साथ 23 जनवरी को हुई सुलह बैठक के विफल होने के बाद बुलाई गई है। चूंकि 25 जनवरी (रविवार) और 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) को बैंक बंद थे। ऐसे में मंगलवार की हड़ताल के कारण लगातार तीन दिनों तक शाखाओं में सेवाएं बाधित रहेंगी। इससे आम लोगों की टेंशन बढ़ गई है।

यूएफबीयू अधिकारियों और कर्मचारियों के नौ संगठनों का संयुक्त निकाय है। उसने कहा कि सुलह बैठक में उनकी मांग पर कोई आश्वासन नहीं मिला। अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने कहा, ‘सुलह कार्यवाही के दौरान विस्तृत चर्चा के बावजूद हमारी मांग पर कोई आश्वासन नहीं मिला। इसलिए, हम हड़ताल पर जाने को मजबूर हैं।’

40 म‍िनट अतिर‍िक्‍त काम के ल‍िए तैयार कर्मचारी

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (एआईबीओसी) के महासचिव रूपम रॉय ने बताया कि मार्च 2024 में वेतन संशोधन समझौते के दौरान इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) और यूएफबीयू के बीच सभी शनिवारों को छुट्टी घोषित करने पर सहमति बनी थी। उन्होंने आगे कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार हमारी वाजिब मांग पर प्रतिक्रिया नहीं दे रही है। इससे काम के घंटों का कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि हम सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना 40 मिनट अतिरिक्त काम करने पर सहमत हुए हैं।’

यूएफबीयू के एक अन्य सदस्य नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज (एनसीबीई) के महासचिव एल चंद्रशेखर ने इस आंदोलन के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा, ‘यह आंदोलन ग्राहकों के खिलाफ नहीं, बल्कि एक टिकाऊ और मानवीय बैंकिंग प्रणाली के लिए है। पांच-दिवसीय बैंकिंग कोई विलासिता नहीं, बल्कि आर्थिक और मानवीय जरूरत है।’

इन बैंकों पर पड़ सकता है हड़ताल का असर

इस हड़ताल के कारण भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं में कैश डिपॉजिट, निकासी, चेक क्‍लीयरेंस और अन्य प्रशासनिक काम प्रभावित हो सकते हैं।

हालांकि, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक जैसे प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंकों के कामकाज पर इस हड़ताल का ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन बैंकों के कर्मचारी उन यूनियनों का हिस्सा नहीं हैं जो हड़ताल कर रही हैं।

बैंक कर्मचारियों की यह मांग है कि उन्हें हफ्ते में पांच दिन काम करने की सुविधा मिले। इसका मतलब है कि शनिवार को बैंक बंद रहेंगे। इसके बदले में कर्मचारी सोमवार से शुक्रवार तक हर दिन 40 मिनट ज्यादा काम करने को तैयार हैं। यह समझना महत्वपूर्ण है कि बैंक कर्मचारियों की यह मांग कोई नई नहीं है। मार्च 2024 में होने वाले वेतन संशोधन समझौते के दौरान भी इस पर चर्चा हुई थी। एक सहमति बनी थी कि शनिवार को छुट्टी दी जाएगी। लेकिन, यूनियनों का दावा है कि अब तक इस पर सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लिहाजा, कर्मचारी अपनी मांग को पूरा करवाने के लिए हड़ताल का सहारा ले रहे हैं।

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