भगवान श्री कृष्ण की वृंदावन लीला 11 वर्ष की है 20 वर्ष की मथुरा लीला और 75 वर्ष की द्वारिका लीला

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कंस वध करने के बाद 20 वर्ष में 18 बार तो जरासंध से युद्ध करके उसको हर बार हराया
होशियारपुर/दलजीत अजनोहा : डेरा बापू गंगा दास जी माहिलपुर में बापू गंगा दास जी वेलफेयर सोसाइटी रजिस्टर्ड के तत्वाधान में शाम 6:00 बजे से चल रही श्रीमद् भागवत कथा में वृंदावन से पधारे राष्ट्रीय संत परम श्रद्धेय श्री गौर दास जी महाराज ने आज रास पंचाध्याय की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान श्री कृष्ण की वृंदावन लीला 11 वर्ष की है 20 वर्ष की मथुरा लीला और 75 वर्ष की द्वारिका लीला है कंस वध करने के बाद 20 वर्ष में 18 बार तो जरासंध से युद्ध करके उसको हर बार हराया फिर प्रभु द्वारिका चले गए वहां भी राक्षसों से निरंतर युद्ध करते हुए प्रभु ने विनाशाय च दुष्कर्ताम का पालन किया आगे सुदामा जी का अद्भुत चरित्र सुनाते हुए महाराज श्री ने बताया कि सुदामा जी बहुत विद्वान थे किंतु कर्मकांड और ज्योतिष आदि इसलिए नहीं करते थे कि इससे अपने पुण्य क्षीण होते हैं और बच्चों को निशुल्क पढ़ाते थे इसलिए कोई बच्चा कभी कुछ दे जाता था तो उनके घर में भोजन प्रसाद बन जाता था नहीं तो समझते थे कि हमारा आज का व्रत है एक दिन उनकी पत्नी सुशीला जी ने प्रभु के आदेश पर सुदामा जी को द्वारका जाने के लिए कहा सुदामा जी बोले मैं कोई व्यापारी नहीं हूं जो भक्ति करके प्रभु से धन और सुख आदि मांग लू सुशीला जी ने कहा आप उनके दर्शन तो कर आओ तब सुदामा जी श्री द्वारिकाधीश जी के दर्शन हेतु घर से चल दिए रास्ते में बहुत सारी बाधाएं आई पर प्रभु ने सबको दूर कर दिया जिस दिन सुदामा जी द्वारकाधीश जी से मिलने घर से चले थे उसी दिन प्रभु ने विश्वकर्मा जी को आदेश दिया कि सुदामा पुरी को द्वारकापुरी से भी अधिक सुंदर एवं संपन्न बना दो सुदामा जी चावल की पोटली भेंट के रूप में ले गए थे कृष्ण जी ने पहले तो सुदामा जी का तिलक किया और उनके माथे पर ब्रह्मा जी द्वारा लिखी हुई *क्षयश्री* रेखा को मिटाए बिना *श्रीक्षय* कर दिया और सुदामा जी से उस चावल को पानेकी जिद करने लगे छीना झपटी में पोटली फट गई तो प्रभु के साथ सभी रानियों ने, 56 करोड़ द्वारका वासियो ने और 33 करोड़ देवी देवताओं ने भी उस चावल प्रसाद को पाया फिर भी वह खत्म नहीं हुआ वो अक्षय तृतीया का दिन था महाराज श्री ने बताया कि शुकदेव जी ने परीक्षित जी से कहा अब 7 दिन पूरे हो गए हैं तुम्हें कोई मृत्यु का भय तो नहीं है ना मैं जब तक नहीं जाऊंगा तक्षक नाग नहीं आएगा तब परीक्षित जी ने गुरु जी का पूजन किया आगे महाराज जी ने कलियुग का वर्णन करते हुए बताया कि कलयुग में राक्षसों की प्रवृत्ति बढ़ेगी जल स्तर घटता जाएगा किंतु जो लोग गुरु जी से या संत जी से दीक्षा लेकर नौकरी व्यापार एवं ग्रहस्थ धर्म का पालन करते हुए भजन करेंगे उनको इसी जन्म में इसी शरीर में प्रभु की प्राप्ति निश्चित होगी महाराज जी द्वारा गाए भजन*** *हे नंद नंदन राधिका रमन कब आओगे* और *श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम* पर मुख्य सेवादार मनदीप सिंह, विकी, दीपक सचदेवा, पारस, मनीष, ईशा गर्ग मंजू और सोसाइटी के सभी सदस्य प्रेम में मग्न होकर नृत्य कर रहे थे

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