भटियात में भाजपा और कांग्रेस पार्टियों से ज्यादा उम्मीदवारों का वर्चस्व

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कुलदीप सिंह पठानिया की वजह से ही जाना जाता भटियात विधानसभा क्षेत्र

ठाकुर सिंह भरमौरी जी ने भटियात को फिर चर्चा में ला दिया

एएम नाथ। चुवाड़ी : चम्बा जिला का भटियात विधानसभा क्षेत्र कुलदीप सिंह पठानिया जी की वजह से ही जाना जाता है। कांग्रेस द्वारा टिकट काटने की वजह से वो दो बार इस विधानसभा क्षेत्र से आज़ाद चुनाव जीत चुके हैं। मगर मान गए पठानिया जी को कांग्रेस के हर बार टिकट काटने के बाबजूद कांग्रेस के उम्मीदवारों को हराया। मगर हर बार जैसे जीते सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस को ही समर्थन दिया। भटियात में भाजपा और कांग्रेस में पार्टियों से ज्यादा उम्मीदवारों का ज्यादा वर्चस्व रहा है। मगर ठाकुर सिंह भरमौरी जी ने भटियात को फिर चर्चा में ला दिया।

भटियात के चर्चा में आने के पीछे दोनों दल ही जिम्मेवार है। किसी स्थापित नेता के क्षेत्र में जैसे ही पकड़ बनी टिकट काट किसी नए व्यक्ति को या फिर बाहर से आये व्यक्ति को टिकट थमा दिया। यहाँ के मतदाताओं ने एक बार भाजपा व कांग्रेस के उम्मीदवारों की करीब करीब ज़मानत जब्त करवा दी थी व मुकाबला दो आज़ाद उम्मीदवारों में करवा पठानिया जी को दूसरी बार आज़ाद चुनाव जिताया। किस्मत के धनी पठानिया अगर चुनाव ना भी जीते तो भी सत्ता में ही रहे। एक बार वित्त आयोग के उपाध्यक्ष बने तो दूसरा चुनाव हारने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष बने। इससे उन्हें सत्ता में बने रहने का लाभ तो मिला लेकिन लगातार सत्ता में रहने के कारण सत्ता विरोधी लहर की सख्त मार का खामियाजा भी भुगतना पड़ा। नतीजन जरियाल लगातार दो बार चुनाव जीते, इन दस सालों में पांच साल पठानिया जी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष रहे तो पांच साल खालिस विपक्ष में रहे, इन पांच सालों में पठानिया जी ने वास्तव में महसूस किया कि विपक्ष में होना होता क्या है। फिर क्या था दो चुनाव लगातार हार चुके पठानिया ने उम्र के इस पड़ाव में एक नए अवतार में आके पूरे विधानसभा क्षेत्र के कोने कोने में जाकर दिन रात अकेले मेहनत कर चुनाव जीत जोरदार वापिसी की और विधानसभा के सर्वोच्च पद तक पहुंचे। यही नहीँ रुके इस पद की गरिमा को पूरे देश में सुशोभित किया। पठानिया जी ने पूरे इस राजनैतिक संघर्ष में जितनी लड़ाई भाजपा से नहीँ लड़ी जितनी कांग्रेस के चंद नेताओं से लड़ी। मैंने अपने 25 साल के पत्रकारिता के अनुभव में पठानिया जी की एक खासियत जो मुझे सब से अच्छी लगी वो यह कि वह राजा वीरभद्र सिंह द्वारा राजनीति में आये और हर अच्छे बुरे दौर में उनके साथ मजबूती से खड़े रहे। इसी वजह इनका दो बार टिकट भी कटा पर उन्होंने राजा साहिब का साथ नहीँ छोड़ा। यह चुनाव उनके द्वारा लड़े गए पिछले सभी चुनावों में से एकमात्र ऐसा चुनाव था जिसमें उन्हें टिकट भी खुद के दम पर मिला तो चुनाव भी खुद के दम व भटियात की जनता के आशीर्वाद से जीता। फिर इस बार सियासत भी अपने दम व अपने हिसाब से की। अब भटियात में कोई अपने हिसाब से चले या कोई भी दावा ठोके यह संभव नहीँ, पठानिया जी भटियात का दूसरा नाम बन चुके हैँ। वैसे बता दूँ कर्मा वापिस आता हैँ आज वही लोग दुखी हैँ जो कभी सत्ता में आके पठानिया जी को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीँ छोड़ते थे। यही नहीँ एक चुनाव मात्र 111 मतों से इन्ही लोगों के कारण हारे थे।

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