चंडीगढ़, 07 अक्टूबर (हि.स.)। पंजाब में बाढ़ के दौरान सहायता के लिए और बाढ़ के बाद पुनर्वास सुनिश्चित करने में प्रदेश भाजपा ने सरकार पर विफलता का आरोप लगाया है। भाजपा पंजाब के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में चार्जशीट जारी की।
शर्मा ने कहा कि बार-बार चेतावनियों, विशेषज्ञों की रिपोर्टों और केंद्र की ओर से कई हजार करोड़ दिए जाने के बावजूद पंजाब सरकार अपने लोगों की रक्षा करने या प्रभावी ढंग से सहायता देने में बुरी तरह नाकाम रही। इस मौके पर प्रदेश उपाध्यक्ष बिक्रम सिंह चीमा, डॉ. सुभाष शर्मा और प्रदेश मीडिया प्रमुख विनीत जोशी ने कहा कि 2023 की बाढ़ से कोई सबक नहीं लिया गया। न तो कोई जांच पूरी हुई और न ही अहम सिफारिशों को लागू किया गया। मौसम विभाग की शुरुआती चेतावनियों के बावजूद सरकार ने बचाव के लिए ठोस कदम नही लिए। मुख्यमंत्री भगवंत मान राज्य से बाहर दौरों में व्यस्त थे, जबकि पंजाब बाड़ से डूब रहा था।
उन्होंने नदियों के तटबंध, हेडवक्र्स और नदियों की भयावह बदइंतजामी का उदाहरण दिया। कई रिपोर्टों ने पंजाब की नदियों पर 133 संवेदनशील बिंदुओं की पहचान की थी। तात्कालिक कदम उठाने की बजाय सरकार ने नदियों के किनारे अवैध खनन को बढ़ावा दिया, जिससे तटबंध कमजोर हुए और बड़े पैमाने पर टूट गए। शर्मा ने आगे कहा कि माधोपुर फ्लडगेट, जिनकी खराब हालत के बावजूद झूठे रूप में ‘सुरक्षित’ बताया गया, के गिरने से पठानकोट, गुरदासपुर और अमृतसर में भयानक तबाही हुई और हजारों परिवार बर्बाद हो गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ से पहले रोकथाम, बाढ़ के दौरान राहत और बाढ़ के बाद पुनर्वास कार्यों के लिए दिए गए 12,500 करोड़ रुपये को खुर्द बुर्द कर दिया गया। शर्मा ने कहा कि सरकार के राहत कार्य केवल प्रचार स्टंट बनकर रह गए। असली काम की जगह फोटो खिंचवाने को तरजीह दी गई। नाव, भोजन और चिकित्सकीय सहायता गंभीर रूप से कम पड़ी।
