*महिला सशक्तिकरण और स्वावलंबन की नई पहचान बनतीं हिम ईरा शाॅप्स : हुनर, आत्मनिर्भरता और हिमाचली अस्मिता की सशक्त कहानी*

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एएम नाथ। कांगड़ा : कांगड़ा जिला इन दिनों एक नयी सामाजिक-आर्थिक क्रांति का साक्षी बन रहा है। हिम ईरा शाॅप्स ने महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त किया है, बल्कि स्थानीय उत्पादों को नई पहचान भी दिलाई है। यह पहल वोकल फॉर लोकल की भावना को जमीनी स्तर पर साकार कर रही है जहाँ हर महिला अपने हुनर से आत्मनिर्भर भारत की कहानी लिख रही है। जिला कांगड़ा प्रशासन द्वारा संचालित हिम ईरा शाॅप्स ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल साबित हो रही हैं। इन दुकानों के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को अपने हस्तनिर्मित उत्पादों के लिए एक स्थायी और सम्मानजनक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।
कांगड़ा जिला प्रशासन ने हिम ईरा ब्रांड के अंतर्गत विशेष बिक्री केंद्र स्थापित किए हैं। इन केंद्रों पर स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पाद जैसे जैविक मसाले, हस्तशिल्प, ऊनी परिधान, बांस से बने उत्पाद, स्थानीय अचार, शहद, मिलेट्स आधारित खाद्य सामग्री और प्राकृतिक काॅस्मेटिक उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इन दुकानों का उद्देश्य न केवल उत्पादों की बिक्री बढ़ाना है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना भी है। प्रशासन का प्रयास है कि प्रत्येक पंचायत या ब्लाॅक स्तर पर सक्रिय स्वयं सहायता समूहों को हिम ईरा से जोड़ा जाए ताकि उनके उत्पादों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहचान मिल सके।
धर्मशाला स्थित उपायुक्त कार्यालय परिसर में जिला कांगड़ा की पहली हिम ईरा शाॅप की स्थापना की गई थी। इसके बाद चामुंडा और कांगड़ा में भी हिम ईरा शाॅपस शुरू की गई हैं। इन दुकानों में न केवल स्थानीय उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं, बल्कि उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और गुणवत्ता सुधार के लिए प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि हर उत्पाद हिमाचली संस्कृति और गुणवत्ता की पहचान बनाए रखे।
हिम ईरा का अर्थ है हिमाचल की अपनी पहचान और इसी उद्देश्य से यह पहल आगे बढ़ रही है। प्रदेश सरकार के सहयोग से इस ब्रांड को राज्यभर में प्रचारित किया जा रहा है, ताकि मेक इन हिमाचल को सशक्त बनाया जा सके। कांगड़ा जिला में हिम ईरा शाॅप्स ने अब तक सैकड़ों महिला समूहों को प्रत्यक्ष आय का स्रोत उपलब्ध कराया है। कई समूहों की मासिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
उपायुक्त हेमराज बैरवा ने कहा कि जिला प्रशासन कांगड़ा द्वारा हिम ईरा शाॅप्स की स्थापना उन स्थानों पर की जा रही है, जहां लोगों की आवाजाही अधिक होती है जैसे एसडीएम कार्यालय परिसर, बीडीओ कार्यालय, मंदिर प्रांगण और अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थल।
इस पहल का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार स्थानीय उत्पादों को एक स्थायी विपणन मंच उपलब्ध करवाना है, ताकि वे अपने उत्पादों की सीधी बिक्री कर सकें और आर्थिक रूप से सशक्त बनें। अब तक डीसी ऑफिस धर्मशाला, एसडीएम ऑफिस कांगड़ा तथा चामुंडा मंदिर के समीप स्थित काॅम्प्लेक्स में हिम ईरा शॉप्स शुरू हो चुकी हैं और यह प्रक्रिया निरंतर जारी है। हमारा लक्ष्य है कि प्रत्येक सब-डिविजन, ब्लाॅक तथा प्रमुख मंदिर परिसरों में हिम ईरा शाॅप्स खोली जाएँ, जिससे अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाएँ लाभान्वित हो सकें।
उन्होंने कहा कि डीसी ऑफिस में संचालित शाॅप से लगभग 70 हजार से एक लाख रुपये की मासिक बिक्री दर्ज की जा रही है, जिसका प्रत्यक्ष लाभ स्थानीय महिला समूहों को मिल रहा है। यह पहल न केवल उनकी आजीविका में वृद्धि कर रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में भी प्रेरित कर रही है। साथ ही, प्रशासन अब इन उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री को भी प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि महिलाएं अपने पारंपरिक और हस्तनिर्मित उत्पादों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अधिक व्यापक बाजार तक पहुंच सकें।
यह योजना माननीय मुख्यमंत्री के उस विजन को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है, जिसके तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना प्राथमिक लक्ष्य है। हिम ईरा शाॅप्स इस दिशा में एक प्रेरणादायक और सफल माॅडल के रूप में उभर रही हैं। उन्होंने कहा कि हिम ईरा के लिए एक आॅनलाइन बिक्री के प्रयास किए जा रहे हैं, जहाँ स्थानीय समूह अपने उत्पादों को डिजिटली बेच सकते हैं। यह कदम वोकल फाॅर लोकल और डिजिटल हिमाचल दोनों अभियानों को मजबूती देता है।
धर्मशाला के समीप पद्धर पंचायत की आशा देवी बताती हैं कि वे 12 महिलाओं के साथ मिलकर अभिलाषा नाम से एक महिला समूह चला रही हैं। आशा देवी कहती हैं कि शुरुआत में उन्होंने अर्क निकालने की मल्टी परपज मशीन की मदद से हर्बल साबुन बनाने का कार्य आरंभ किया। पहले एक ही प्रकार का साबुन बनाया जाता था, लेकिन जैसे-जैसे अनुभव और आत्मविश्वास बढ़ा, उन्होंने काम का दायरा बढ़ाते हुए कई प्रकार के साबुन, शैम्पू और फेस क्रीम जैसे उत्पाद तैयार करने शुरू किए।
आशा देवी गर्व से बताती हैं कि उनके सभी उत्पादों को हिम ईरा शाॅप में बिक्री के लिए रखा जाता है, जिससे उन्हें न केवल आय का स्रोत मिला है बल्कि स्थानीय स्तर पर महिला स्वावलंबन की एक प्रेरक मिसाल भी बनी हैं।
हिम ईरा शाॅप्स कांगड़ा जिले में महिला सशक्तिकरण की एक सजीव मिसाल बन चुकी हैं। यह पहल न केवल महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता दे रही है, बल्कि वोकल फॉर लोकल के मंत्र को भी साकार कर रही है।
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