मेडिकल कालेज हमीरपुर के डॉक्टरों ने बदल दी 36 वर्षीय राजन मनकोटिया की जिंदगी

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एक वर्ष में दोनों कूल्हों और दोनों घुटनों के प्रत्यारोपण की दुर्लभ सर्जरी की,  एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस की जटिल बीमारी के कारण चलने-फिरने में असमर्थ थे राजन
एएम नाथ । हमीरपुर 16 फरवरी। डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कालेज (आरकेजीएमसी) हमीरपुर के ऑर्थो विभाग के डॉक्टरों ने एक बहुत ही दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर एक युवा मरीज को नई जिंदगी दी है।
एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस जैसी दुर्लभ बीमारी से ग्रस्त नादौन क्षेत्र के 36 वर्षीय राजन मनकोटिया के दोनों घुटने और कूल्हे डिफ्यूज हो चुके थे। चलने-फिरने में असमर्थ होने के कारण जब वह दिव्यांगता का सर्टिफिकेट बनवाने के लिए आरकेजीएमसी अस्पताल हमीरपुर में आए तो ऑर्थो (हड्डी रोग) विभाग के डॉ. शिखर डोगरा ने राजन मनकोटिया को घुटनों और कूल्हों के प्रत्यारोपण की सलाह दी। एम्स में कुछ आवश्यक दवाइयों की डोज लेने के बाद नवंबर 2024 में आरकेजीएमसी अस्पताल हमीरपुर में राजन के कूल्हे प्रत्यारोपण किया गया। इसके बाद अप्रैल 2025 में दूसरे कूल्हे का प्रत्यारोपण किया गया। जुलाई 2025 में बाएं घुटने और जनवरी 2026 में दाएं घुटने का भी सफल प्रत्यारोपण आरकेजीएमसी अस्पताल में ही किया गया।
आरकेजीएमसी के प्रधानाचार्य डॉ. रमेश भारती ने बताया कि डॉ. शिखर डोगरा और उनकी टीम द्वारा लगभग एक वर्ष की अवधि में ही चार बड़े ऑपरेशन करना एक असाधारण उपलब्धि है। इस तरह की सर्जरी बहुत ही दुर्लभ होती हैं। यह सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं एवं योजनाओं की सफलता का प्रतीक है।
ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. शिखर डोगरा ने बताया कि राजन मनकोटिया की हालत बहुत खराब थी। उनके लिए सामान्य कुर्सी पर बैठना, खड़ा होना और चलना-फिरना बहुत मुश्किल था। लगभग एक वर्ष में ही दोनों कूल्हों और दोनों घुटनों के प्रत्यारोपण के बाद राजन की मुद्रा अब पूरी तरह सीधी हो गई है। वह कुर्सी पर आसानी से बैठ सकते हैं और बिना सहारे के चल सकते हैं।
उधर, राजन मनकोटिया ने बताया कि वह प्राइवेट सैक्टर में नौकरी करते थे, लेकिन एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस जैसी दुर्लभ बीमारी के कारण उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी और वह घर तक ही सीमित हो गए थे। लेकिन, आरकेजीएमसी अस्पताल के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. शिखर डोगरा और उनकी टीम ने उनको नई जिंदगी दी है। प्रदेश सरकार के हिमकेयर कार्ड से ही उनका इलाज एवं सभी सर्जरी हुई है। इसमें उनका कोई खर्चा नहीं हुआ है।
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फोटो कैप्शन 1: राजन मनकोटिया
फोटो कैप्शन 2 और 3: आरकेजीएमसी के प्रधानाचार्य डॉ. रमेश भारती और ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. शिखर डोगरा के साथ राजन मनकोटिया
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