मॉनसून सत्र में आपदा से तबाही पर चर्चा : आमने-सामने हुए जयराम ठाकुर और सीएम सुक्खू

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एएम नाथ । शिमला : हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया है। विधानसभा के पूर्व सदस्य गणेश दत्त भरवाला की मृत्यु पर शोक प्रकट करने के बाद विपक्ष ने नियम-67 के तहत कार्य स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा मांगी।

विपक्षी भाजपा हिमाचल में आई हालिया मानसूनी आपदा से हुई तबाही पर नियम 67 के तहत चर्चा की मांग कर रही थी। इसी बीच विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि नियम 102 के तहत इसी विषय पर कांग्रेस के विधायकों द्वारा सरकारी संकल्प पेश किया जाना है और दोनों का विषय एक ही है। ऐसे में नियम 102 के तहत चर्चा होगी। लेकिन विपक्षी भाजपा स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग पर अड़ी रही। हल्की नोकझोंक के बाद सत्ता पक्ष ने विपक्ष की मांग मानते हुए नियम 67 के तहत आपदा पर चर्चा के लिए सहमति दी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि सरकार इस गंभीर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि हिमाचल लगातार हर साल भारी आपदाओं का सामना कर रहा है। वर्ष 2023 और 2024 में भयंकर तबाही हुई और इस बार 2025 में तो नुकसान का आगाज प्री-मानसून से ही हो गया। उन्होंने कहा कि इस बार की आपदा ने लोगों की जिंदगी को हिला कर रख दिया। 30 जून की रात भारी बारिश ने जबरदस्त तबाही मचाई। कई लोग रात को अपने घरों में चैन की नींद सोए थे, लेकिन सुबह उठते ही उनके घर, खेत और बागीचे सब मलबे में तब्दील हो चुके थे।

जयराम ठाकुर ने बताया कि मंडी जिला, विशेषकर सराज विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। एक ही रात में 42 लोगों की मौत हुई, जिसमें से 29 लोग उनके हल्के के थे और यह संख्या अब बढ़कर 31 हो गई है। नाचन में 9 और करसोग में 3 लोगों की मौत हुई, जबकि कुल्लू, चंबा, किन्नौर और ऊना जिलों में भी तबाही दर्ज हुई। कई घर जमींदोज हो गए, सड़कें, बिजली और पेयजल योजनाएं पूरी तरह से ठप हो गईं। उन्होंने कहा कि सराज क्षेत्र में आज भी 500 से ज्यादा परिवार किराए के मकानों, सरायों और रिश्तेदारों के घरों में शरण लिए हुए हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस बार की आपदा अलग किस्म की थी, क्योंकि पहाड़ 12 से 13 हजार फीट की ऊंचाई से दरके और जहां न तो कोई सड़क थी, न डंपिंग साइट और न कोई निर्माण कार्य। उन्होंने सरकार पर राहत कार्यों में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया और कहा कि लोक निर्माण विभाग को सराज में 500 करोड़ का नुकसान हुआ, लेकिन सरकार ने मात्र 2 करोड़ की सहायता दी है। उन्होंने सरकार से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को प्राथमिकता देने की मांग की।

इस पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि जैसे ही आपदा की जानकारी मिली, वे स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि 30 जून को नुकसान का पता चलते ही मैं अगले दिन धर्मपुर गया और फिर को हेलीकॉप्टर से सराज में राशन डलवाया। वहां पहुंचने वाला पहला व्यक्ति मुख्यमंत्री था। इसके बाद एसपी, डीसी की अगुवाई में राहत व बचाव टीमें सक्रिय रहीं। एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीमें हमारे आग्रह पर प्रभावित इलाकों में आईं। मंत्रियों ने भी प्रभावित इलाकों का दौरा किया। हमने राहत और बचाव में किसी भी प्रकार की कमी नहीं छोड़ी।

उन्होंने आगे बताया कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि विपक्ष के नेता से भी लगातार संपर्क बनाए रखें और उन्हें हेलीकॉप्टर सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए। सीएम सुक्खू ने कहा कि सरकार ने हर संभव मदद पहुंचाई और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती। उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्षी नेता केवल अपने हल्के में सक्रिय रहे, जबकि सरकार ने पूरे प्रदेश में प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्यों को प्राथमिकता दी।

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