युवाओं की अचानक क्यों हो रही मौत?… रिसर्च में AIMS ने कर दिया बड़ा खुलासा

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नई दिल्ली: भारत में युवाओं की अचानक मौत एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। चिंता की बात यह है कि 20 से 40 वर्ष की उम्र के बिल्कुल स्वस्थ दिखने वाले लोग बिना किसी चेतावनी के अचानक गिरकर दम तोड़ रहे हैं।

कोरोना महामारी के बाद ऐसे ही कई वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहे हैं। शादी में नाचते व्यक्ति, बैडमिंटन खेलते खिलाड़ी या दोस्तों के साथ चलते युवक के अचानक गिरने के वायरल वीडियो ने इस डर को और बढ़ाया है। इन वीडियो में दावा किया जा रहा है कि स्वस्थ दिखने वाले युवाओं की अचानक कार्डियक अरेस्ट की वजह से मौत हो रही है। डॉक्टरों को खासकर 20, 30 और 40 की उम्र के लोगों में ऐसी अचानक, अप्रत्याशित मौतों की चिंता है।
अचानक हो रही मौंतो पर AIIMS की रिसर्च

इस समस्या को समझने के लिए, AIIMS, नई दिल्ली ने एक नई रिसर्च की है, जो इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित हुआ है। यह अध्ययन भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की एक बड़ी परियोजना का हिस्सा है। इसका मकसद यह पता लगाना था कि अचानक मौतें कितनी बार होती हैं, उनके कारण क्या हैं और खासकर युवा वयस्कों में इनसे जुड़े जोखिम कारक क्या हैं।

18 से 45 वर्ष के युवाओं को ज्यादा खतरा

इस अध्ययन में 2,214 लोगों के पोस्टमॉर्टम की जांच की गई। इनमें से 180 मौतें (8.1%) ‘अचानक मृत्यु’ की श्रेणी में आईं। चौंकाने वाली बात यह रही कि इनमें से 103 मौतें (57.2%) 18 से 45 वर्ष की आयु के युवाओं की थीं। अधिकतर मामलों में परिजनों ने बताया कि मृतक घटना से पहले तक पूरी तरह स्वस्थ लग रहे थे।

भारत में अचानक मौतों का कोई आधिकारिक नेशनल रिकॉर्ड नहीं है, खासकर युवा वयस्कों में। AIIMS नई दिल्ली के फोरेंसिक मेडिसिन और पैथोलॉजी विभागों के शोधकर्ताओं ने मई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच किए गए 2,214 लगातार मेडिको-लीगल पोस्टमॉर्टम का विश्लेषण किया।

हृदय रोग के कारण सबसे अधिक युवाओं की मौत

AIIMS द्वारा की गई इस रिसर्च का सबसे अहम निष्कर्ष यह है कि युवाओं में अचानक मौत का सबसे बड़ा कारण हृदय रोग है। 42.6% मामलों में मौत की वजह दिल से जुड़ी बीमारियां रहीं। पोस्टमॉर्टम में पाया गया कि कई युवाओं की हृदय धमनियों में 70% से ज्यादा रुकावट थी। सबसे ज्यादा प्रभावित धमनी लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग (LAD) पाई गई, जो जानलेवा हार्ट अटैक का सामान्य पैटर्न है।

रिसर्च के अनुसार, यह बात विशेष रूप से चिंताजनक है कि इन व्यक्तियों में से अधिकांश ने हार्ट से जुड़ी कोई भी दवा नहीं ली थी, कई मामलों में तो दिल की समस्याओं के लिए कभी जांच भी नहीं करवाई गई थी। अध्ययन के अनुसार, इसका सीधा मतलब यह है कि युवा भारतीयों में घातक दिल की बीमारी अक्सर बिना किसी चेतावनी के चुपचाप बढ़ रही होती है।

हर पांचवीं मौत की वजह अब भी रहस्य

एम्स की रिसर्च में यह भी सामने आया कि 21.3% मामलों में पूरी जांच के बाद भी मौत की स्पष्ट वजह नहीं मिल सकी। इन्हें ‘नेगेटिव ऑटोप्सी’ कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में दिल की इलेक्ट्रिकल (रिदम) जिम्मेदार हो सकती हैं, जो शरीर में कोई संरचनात्मक बदलाव नहीं छोड़तीं और सामान्य पोस्टमॉर्टम में पकड़ में नहीं आतीं।

PSRI हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ. केके. तलवार ने कहा कि यह अध्ययन युवाओं में समय से पहले होने वाली कोरोनरी आर्टरी डिजीज की गंभीरता को दिखाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन मामलों में जेनेटिक जांच और परिवार के अन्य सदस्यों की स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है।

21.3% मौतें सांस से जुड़ी बीमारियों से

रिसर्च के मुताबिक, अचानक मौत केवल हृदय रोग तक सीमित नहीं है। युवाओं में 21.3% मौतें सांस से जुड़ी बीमारियों जैसे निमोनिया और टीबी की वजह से हुईं। इसके अलावा शराब के आदी लोगों में नींद के दौरान उल्टी के कारण दम घुटने (एस्पिरेशन) से मौत के मामले भी सामने आए। महिलाओं में फटी हुई एक्टोपिक प्रेग्नेंसी और गर्भाशय फटने जैसी स्थितियों से अचानक मौत दर्ज की गई।

कब और कहां हुई मौतें

रिसर्च में खुलासा हुआ है कि 55 प्रतिशत से अधिक मौतें अचानक घर पर हुईं है, जबकि 30 प्रतिशत मौतें यात्रा के दौरान हुईं हैं। जबकि 40 प्रतिशत मौतें रात या तड़के हुईं है। परिजनों ने अक्सर अचानक बेहोशी, सीने में दर्द, सांस फूलना और पेट दर्द जैसे लक्षण बताए। जो यह संकेत देते हैं कि युवाओं में हार्ट अटैक हमेशा क्लासिक लक्षणों के साथ नहीं आता।

कोविड वैक्सीन के कारण हो रही मौंते?

वर्बल ऑटॉप्सि डेटा का उपयोग करके, शोधकर्ताओं ने कोविड संक्रमण के इतिहास और टीकाकरण की स्थिति की जांच की। अध्ययन में कोविड संक्रमण या टीकाकरण के साथ अचानक मौतों का कोई महत्वपूर्ण संबंध नहीं पाया गया। हालांकि अधिकतर सभी आयु समूहों के लोगों ने कोविड वैक्सीन लगवाई थी। 70 प्रतिशत से अधिक 46-65 वर्ष की आयु के वयस्कों की मौत कोरोनरी धमनी रोग के कारण हुई है।

AIIMS द्वारा की गई इस रिसर्च के अनुसार, लोगों में यह गलत धारणा है कि कि युवाओं की मौत अचानक हो रही है। रिसर्च में निष्कर्ष निकला है कि ज्यादातर मामलों में मौत का कारण युवाओं के शरीर में चुपचाप से बढ़ रही बीमारियां हैं, जिन्हें युवा समय पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसमें सबसे अहम बीमारी हार्ट की ब्लॉकेज या आनुवंशिक रिदम डिसऑर्डर ह। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में समय रहते हृदय जांच, धूम्रपान और शराब से दूरी, और परिवार स्तर पर स्क्रीनिंग ही ऐसी त्रासदियों को रोकने का रास्ता है।

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