खाद्य सुरक्षा के नाम पर गरीबों से हो रहा मजाक, राशन की जगह 1500 रुपये मासिक देने की मांग
गढ़शंकर। भारत जगाओ आंदोलन के नेता जय गोपाल धीमान ने नैशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत गरीब परिवारों को मिलने वाली गेहूं की मात्रा पर सवाल उठाते हुए इसे उनकी वास्तविक खाद्य जरूरतों के लिए अपर्याप्त बताया है। उन्होंने कहा कि प्रति व्यक्ति रोजाना करीब 166.7 ग्राम गेहूं मिलती है, जिसकी कीमत उनके अनुसार लगभग 4.96 रुपये प्रतिदिन बनती है।
धीमान ने कहा कि इतनी कम मात्रा को पूर्ण भोजन मानना गरीब परिवारों की खाद्य जरूरतों के साथ न्याय नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि क्या केवल इतनी गेहूं से किसी व्यक्ति को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन मिल सकता है। उन्होंने सरकार से खाद्य सुरक्षा योजना की समीक्षा कर गरीब परिवारों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार व्यवस्था करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि लोगों को कई महीनों का राशन एक साथ देने के बजाय ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें जरूरतमंद परिवार अपनी आवश्यकता और पसंद के अनुसार खाद्य सामग्री खरीद सकें। धीमान ने राशन कार्ड आधारित व्यवस्था की जगह पात्र परिवारों को 1500 रुपये प्रतिमाह देने की मांग भी रखी।
धिमान ने कहा कि नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट-2013 का उद्देश्य लोगों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उनके अनुसार खाद्य सुरक्षा केवल गेहूं बांटने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि गरीब परिवारों को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाना भी इसका हिस्सा होना चाहिए।
उन्होंने सरकार से पंजाब में सब्सिडी वाले खाद्यान्न की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की। धिमान ने कहा कि सरकार को गरीबों की खाद्य जरूरतों, पोषण और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिससे उन्हें सम्मानजनक जीवन के लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध हो सके।
उन्होंने कहा कि गरीबों को पर्याप्त भोजन उपलब्ध करवाना कल्याणकारी सरकार की जिम्मेदारी है, इसे केवल राशन वितरण तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
फोटो कैप्शन : भारत जगाओ आंदोलन के नेता जय गोपाल धीमान
