लिव-इन संबंध में रह रहीं दो युवतियों को हाई कोर्ट की सुरक्षा

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चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहीं दो बालिग महिलाओं को राहत देते हुए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने पुलिस प्रशासन को स्पष्ट तौर पर आदेश दिया है कि याचिकाकर्ताओं के जीवन और स्वतंत्रता को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुंचे।

यह आदेश जस्टिस मंदीप पन्नू की पीठ ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें दोनों महिलाओं ने अपने परिवारों से खतरे की आशंका जताई थी। अदालत ने आधार कार्ड सहित प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर पाया कि दोनों याचिकाकर्ता बालिग हैं और अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी कि दोनों महिलाएं अपनी मर्जी से साथ रह रही हैं, लेकिन परिवार के विरोध के कारण उन्हें जान का खतरा है। उन्होंने यह भी बताया कि 16 अप्रैल 2026 को संबंधित पुलिस अधिकारियों को शिकायत दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

इस पर अदालत ने लुधियाना जिले के खन्ना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करें और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश संबंध की वैधता पर कोई मुहर नहीं लगाता, बल्कि केवल मौलिक अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से पारित किया गया है।

अदालत ने अपने आदेश में भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है, चाहे वह किसी भी प्रकार के संबंध में क्यों न हो। राज्य का यह कर्तव्य है कि वह इस अधिकार की रक्षा करे।

अधिकार में अनावश्यक हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का भी हवाला दिया गया, जिनमें समान लिंग के वयस्कों के साथ रहने के अधिकार को संरक्षित करने और ऐसे मामलों में तत्काल पुलिस सुरक्षा देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में पहले दृष्टया सुरक्षा प्रदान करना आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार की हिंसा या उत्पीड़न को रोका जा सके।

हाई कोर्ट ने यह भी दोहराया कि बालिग व्यक्तियों को अपनी पसंद के साथी के साथ रहने का अधिकार है और इस अधिकार में अनावश्यक हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है। हालांकि, यदि किसी आपराधिक मामले में संलिप्तता पाई जाती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

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