श्रीमद भागवत कथा में कंस वध व बाल लीलाओं का किया आयोजन : मलपुर में श्रीमदभागवत कथा का छठा दिन

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बद्दी, 10 अप्रैल (तारा) : मलपुर शिव मंदिर में श्री मदभागवत कथा के छठे दिन कथा वाचक नरोतमपुरी ने कंस वध व भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को वर्णन किया।

कथा वाचक ने बताया कि कंस अपनी बहन देवकी से बहुत प्यार करता था। जब उसने देवकी का विवाह वासुदेव से किया तो उसे अकाशवाणी हुई कि तेरी बहन देवकी की आठवीं संतान तेरी मोत का कारण बनेगी। इस पर वह भयभीत हो गया और उसी समय तलवार निकाली और देवकी को हत्या करने लगा जिस पर वासुदेव ने उसे उसकी जीवन की भीख मांगते हुए कहा कि अब यह मेरी पत्नी है। जो भी इसकी 8वीं संतान होगी उसे मार देना। कंस के यह बात समझ में आ गई और उसने दोनों का कारागार में बंद कर दिया। उसके बाद पहरा लगा दिया। पहले कंस ने सोचा कि उसकी आठवीं ही संतान को मारेगा लेकिन उसके सलाहकारों ने कहा कि अगर 8वीं संतान पहले हो गई तो वह भी उसकी मौत का कारण बन सकती है। जिससे उन्हें सभी को मारना शुरू कर दिया। उसने अपने पिता अग्रसेन को भी कैद में डाल दिया। और स्वयं राजा बन गया।
जब देवकी की 8वीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण हुए तो सभी पहरेदार सौ गए और स्वयं कारागार के दरवाजे खुल गए। अचानक बेड़ियां हटने से वासुदेव भगवान कृष्ण को लेकर नंदबाबा के घर आए वहां पर यशोदा माता के बेटी हुई थी। उसे लेकर वह कारागार में पुहंचे जैसे ही बच्ची ने रोने की आवाज की तो पहरेदार जाग गए। और कंस तलवार लेकर बच्ची को मारने आया लेकिन जैसे ही उसने हाथ पर उसे उठाया तो वह आकाश की ओर उड गई और जाते समय बताया कि उसे मारने वाले गोकुल में पैदा हुआ है। जिस पर कंस ने सभी बच्चों को मारने की योजना बनाई।
पुतना को भेजा और पुतना जैसे ही भगवान को दूध पलाने लगी तो भगवान से उनके प्राण की निकाल दिए और उसे मां की उपाधि देकर मोक्ष दिया। जब वह थोड़े बड़े हुए तो क्रुर को मथुरा बुलाया और दोनो भाईयों को पहले मल युद्ध कराया। कई प्रकार की युद्ध कराए लेकिन भगवान हमेशा सबको पराजित करते हुए कंस को पकड़ कर ले गए उसे मौत के घाट उतार दिया। उसके बाद उन्होंने अपने माता पिता को आजाद कराया और अपने नाना उग्रसेन को मथुरा का राजा बनाया।
इस मौके पर तहसीलदार हुसन चंद, रामलाल चौधरी, सुरेश चौधरी, डीआर चंदेल, पूर्व प्रधान नसीब सैणी, कृष्ण कौशल, महेश कौशल, श्याम चौधरी समेत गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कैप्शन-मलपुर में आयोजित भागवत कथा के समापन पर आरती में भाग लेते हुए ग्रामीण

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