पुनीत महाजन : चंडीगढ़, 9 जून। कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ गवर्नमेंट एंड एमसी एम्प्लाइज एंड वर्कर्स, यूटी चंडीगढ़ द्वारा आज सेक्टर-41 स्थित जायका में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता में चंडीगढ़ नगर निगम एवं चंडीगढ़ प्रशासन के अधीन कार्यरत कर्मचारियों और आउटसोर्स कर्मियों से जुड़े विभिन्न लंबित मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया तथा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए गए।
कमेटी के प्रधान सतिंदर सिंह एवं महासचिव राकेश कुमार ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर नहीं हैं और न ही कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित करने को तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कर्मचारी अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलन करते हैं तो प्रशासन बातचीत करने की बजाय कानून-व्यवस्था का हवाला देकर कर्मचारियों पर मामले दर्ज करता है।
नेताओं ने कहा कि प्रशासन न तो श्रम कानूनों को पूरी तरह लागू कर रहा है और न ही न्यायालयों के आदेशों का पालन कर रहा है। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों के पास संघर्ष का रास्ता अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। उन्होंने राजनीतिक दलों द्वारा कर्मचारियों के मुद्दों के प्रति उदासीन रवैये पर भी चिंता व्यक्त की।
प्रेस वार्ता में कमेटी ने आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए “समान काम के लिए समान वेतन”, सुरक्षित रोजगार नीति (सिक्योर्ड पॉलिसी), समय पर वेतन भुगतान, बोनस, ईएसआई पात्रता सीमा बढ़ाने, डेली वेज कर्मचारियों को नियमित करने, रिक्त पदों पर भर्ती, पदोन्नति में पारदर्शिता, नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों की बहाली, ठेका व्यवस्था में शोषण पर रोक, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को समय पर पेंशन एवं मेडिकल प्रतिपूर्ति, कैशलेस मेडिकल सुविधा, मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी तथा सफाई एवं अन्य कर्मचारियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने सहित 16 प्रमुख मांगें उठाईं।
कमेटी ने विशेष रूप से कहा कि कॉन्ट्रैक्ट लेबर (रेगुलेशन एंड एबोलिशन) एक्ट, 1970 के तहत आउटसोर्स कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाना चाहिए। इसके अलावा नगर निगम और प्रशासन के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को श्रम कानूनों के अनुरूप सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जानी चाहिए।
नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम से बड़ी संख्या में कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने इस मामले में पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की।
कोऑर्डिनेशन कमेटी ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन कर्मचारियों के साथ वार्ता शुरू नहीं करता और मांगों के समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाता, तो 16 जून को यूटी कर्मचारी विशाल रैली आयोजित करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
प्रेस वार्ता में कमेटी के चेयरमैन सुरेश कुमार, कन्वीनर रघुबीर चंद, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट राजिंदर कुमार, बलविंदर सिंह पाबला, चीफ पैट्रन अनिल कुमार सहित विभिन्न यूनियनों के पदाधिकारी और कर्मचारी नेता उपस्थित रहे।
