सलूणी में मानवशास्त्रीय शोध कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न : एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय और जीसी सलूणी का संयुक्त शैक्षणिक प्रयास

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हिमालयी ग्रामीण जीवन के अध्ययन को मिला नया आयाम

एएम नाथ। सलूणी, चंबा : एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि के तहत श्रीनगर, गढ़वाल (उत्तराखंड) स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के मानवशास्त्र विभाग ने राजकीय महाविद्यालय सलूणी, चंबा के सहयोग से सलूणी विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक मानवशास्त्रीय क्षेत्रीय शोध कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न किया। यह अध्ययन 28 मार्च से 7 अप्रैल 2026 तक एम.ए./एम.एससी. चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया गया।
इस शोध पहल का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को मानवशास्त्रीय अनुसंधान पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था, जिससे वे क्षेत्र विशेष के जैव-सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक पहलुओं को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें। शोध के दौरान विद्यार्थियों ने स्थानीय समुदायों के साथ सहभागितापूर्ण अवलोकन, साक्षात्कार तथा पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के दस्तावेजीकरण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया।
विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सर्वेन्द्र यादव एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुरेश भट्ट के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों की टीम ने क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य किया। वहीं, राजकीय महाविद्यालय सलूणी ने स्थानीय समन्वय, क्षेत्रीय पहुँच तथा आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे शोध कार्य सुचारु रूप से सम्पन्न हो सका।
इस अध्ययन से प्राप्त निष्कर्षों के माध्यम से हिमालयी क्षेत्र, विशेषकर चंबा जिले की सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण जीवन शैली को समझने में सहायता मिलेगी। साथ ही, यह शोध सतत ग्रामीण विकास और स्थानीय ज्ञान परंपराओं के संरक्षण में भी उपयोगी सिद्ध होने की अपेक्षा रखता है। प्राप्त आंकड़ों का उपयोग शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा, जिसमें विद्यार्थियों के शोध प्रबंध एवं भविष्य के शोध प्रकाशन शामिल हैं।
इस अवसर पर राजकीय महाविद्यालय सलूणी के प्राचार्य डॉ. मोहिंदर सलारिया ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया। कार्यक्रम का समन्वय पंकज कुमार, सहायक प्राध्यापक एवं उन्नत भारत अभियान के समन्वयक द्वारा किया गया।
7 अप्रैल को आयोजित समापन बैठक में दोनों संस्थानों ने भविष्य में संयुक्त शोध कार्यों एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षर करने पर सहमति व्यक्त की। यह पहल शैक्षणिक ज्ञान को जमीनी वास्तविकताओं से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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