भोग विलास के जीवन में अपना धर्म व कर्तव्य भूल रहे हिंदू
बददी, 12 अप्रैल (तारा) : हिंदू समाज को अपने मूल्यों व संस्कारों को पहचानने की जरुरत है। आज सीमीत होते परिवारों से जहां समाज में धर्म को क्षति हुई वहीं सामाजिक एकता पर भी फर्क पड़ा है। यह बात बददी तहसील के गांव पलांखवाला (कुंजाहल)में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के दौरान अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक आचार्य 108 मंहत साध्वी ऋषि गिरी जी महाराज ने कहे। उन्होने कहा कि जब हम धर्म के मार्ग पर चलकर अपना सुधार नहीं कर पा रहे है तो हमारे बच्चों का कैसे सुधार हो सकता है। बच्चों को भी अध्यात्म व कथा के श्रवणों मे बिठाना चाहिए।
उन्होने कहा कि हमारा हर देवता शस्त्र व शास्त्रों से परिपूर्ण होता है इसलिए हमें समय के साथ सब कुछ सीखना चाहिए। उन्होने कहा कि वर्तमान युग कलयुग का युग है इसमें सांस्कृति, धार्मिक, आर्थिक, शारीरिक व मानसिक संकट आएंगे ही आएंगे लेकिन महत्वपूर्ण है कि उनसे बचा कैसे जाए, जो कि बहुत की मुश्किल है। हर चीज में आजकल मिलावट है लेकिन धर्म व अध्यात्म में बिल्कुल मिलावट नहीं होनी चाहिए। यह शुद्व सात्विक द्वार है जो कि हमें प्रभु से मिलाता है।
भागवत कथा ठुमके लगाने के लिए नहीं-साध्वी
साध्वी ने कहा कि भागवत कथा ह्रदय में उतारने वाली कथा न कि यह पंडाल ठुमके लगाने के लिए होता है। आजकल कथाओं का स्वरुप बिगड़ गया है और महिलाओं के नाच गान को इसमें महत्व दिया जाने लगा है जो कि गलत है। उन्होने सोशल मीडिया के प्रभावों में पर बोलते हुए कहा कि पहले के जमाने में नर्तकियां नाचती थी और आमजन उसको देखता है वहीं आज अच्छे भले घरों की महिलाएं अर्धनगन होकर रीलें बनाकर उस पर नाचती है और गरीब लोग उसको देखते हैं। उन्होने कहा कि जो भी सच्ची सनातनियां होंगी वो इन आंडबरों से कोसों दूर रहती है और एक महिला ही अपने परिवार का संचालन व परवरिश हिंदू रीति रिवाजों से करती है।
कथा के आयोजक अच्छरपाल कौशल व प्रोमिला कौशल ने बताया कि आज से शुरु हुई कथा 18 अप्रैल तक चलेगी और उसी दिन दोपहर से शाम भंडारा चलेगा। 18 अप्रैल को ही शाम को 6 बजे से 8 बजे तक भजन गायिका वंदना धीमान बाबा बालक नाथ व माता की चौकी में भजन सुनाकर श्रद्वालुओं को अध्यात्म से सरोबार करेंगी।
कैपशन-बददी तहसील के पलांखवाला गांव में प्रवचनों की अमृतवर्षा करती अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक मंहत साध्वी ऋषि गिरी जी महाराज।
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कैपशन-कथा का आनंद उठाते श्रद्वालुगण।
