हिमाचल की जरूरतों पर शोध करें विश्वविद्यालय, शिक्षा को रोजगार से जोड़ें : सुक्खू

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जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन, पर्यटन, बागवानी, स्वास्थ्य और अक्षय ऊर्जा पर अनुसंधान को बढ़ावा देने का आह्वान

रोहित जसवाल।   सोलन। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश में स्थापित विश्वविद्यालयों से हिमाचल की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान परियोजनाओं को बढ़ावा देने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाले संस्थान न रहकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और विकास की जरूरतों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को सोलन में ‘हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग एवं निजी विश्वविद्यालयों के संस्थागत योगदान, भविष्य की प्राथमिकताएं एवं सहयोगात्मक कार्यप्रणाली’ विषय पर आयोजित शैक्षणिक सम्मेलन सत्र और छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे। सम्मेलन का आयोजन हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग ने प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों के सहयोग से किया।

जलवायु परिवर्तन से लेकर स्वास्थ्य तक शोध पर जोर

सुक्खू ने कहा कि मौसम में बदलाव, जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन, सतत पर्यटन, अक्षय ऊर्जा, बागवानी, स्वास्थ्य और पर्यावरण ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें सार्थक अनुसंधान हिमाचल के हितों के संरक्षण में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। उन्होंने इन क्षेत्रों में नवाचार की संभावनाओं को मजबूत करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि निजी विश्वविद्यालय इस दिशा में महत्वपूर्ण सहयोगी हैं। राज्य सरकार के लिए निजी विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण भागीदार हैं।

उद्योग की जरूरत के मुताबिक बदले जाएं पाठ्यक्रम

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए उद्योग जगत और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। विश्वविद्यालयों को उद्योगों की आवश्यकताओं और उभरते रोजगार अवसरों के अनुरूप अपने पाठ्यक्रम लगातार अपडेट करने चाहिए, ताकि युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों से संकाय विकास, अनुसंधान सहयोग, छात्र आदान-प्रदान, स्टार्टअप और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में मिलकर काम करने का आग्रह किया।

156 स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू

सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार बेहतर पाठ्यक्रम, प्रयोगशालाओं, अनुसंधान सुविधाओं, उद्योगों से संपर्क तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के रोजगार अवसर उपलब्ध करवाने की दिशा में काम कर रही है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक अधोसंरचना को मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा की पहुंच, गुणवत्ता और विद्यार्थियों के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार हिमाचल शिक्षा की गुणवत्ता के क्षेत्र में वर्ष 2021 के 21वें स्थान से अब 5वें स्थान पर पहुंचा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूली शिक्षा मजबूत भविष्य की नींव है। सरकार बहुसुविधा संपन्न राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल स्थापित करने के साथ सरकारी विद्यालयों को सीबीएसई से जोड़ने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 156 विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू किया जा चुका है, जबकि अगले वर्ष 100 और सरकारी विद्यालयों को सीबीएसई से संबद्ध किया जाएगा।

बागवानी और पर्यटन से लेकर सौर ऊर्जा तक कौशल आधारित कार्यक्रम

मुख्यमंत्री ने निजी विश्वविद्यालयों से बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि तकनीक, पर्यटन एवं आतिथ्य, अक्षय ऊर्जा, वानिकी और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में कौशल आधारित तथा उद्योग से जुड़े कार्यक्रम शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए पाठ्यक्रम प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान सुक्खू ने जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में सोच विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने दुग्ध उत्पादन, प्राकृतिक कृषि और बंजर भूमि पर सौर विद्युत उत्पादन के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने सरकार की ओर से शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे सुधारों तथा प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी दी।

इससे पहले मुख्यमंत्री ने विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों की ओर से अनुसंधान और पेटेंट पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा सैनिक कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनीराम शांडिल ने निजी विश्वविद्यालयों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से लक्ष्य निर्धारित कर मेहनत करने और देशहित में योगदान देने का आह्वान किया।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा, विधायक संजय अवस्थी, विनोद सुल्तानपुरी, विभिन्न विभागों के अधिकारी, निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं उपकुलपति, आयोग के सदस्य, शिक्षक, विद्यार्थी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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