हिमाचल में डेयरी किसानों का फूटा गुस्सा : दूध का भुगतान समय पर न मिलने से बढ़ी नाराजगी, आंदोलन की चेतावनी

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दत्तनगर मिल्क प्लांट से जुड़े करीब 26 हजार किसान परेशान; नाहन में हिमाचल किसान सभा की बैठक, सरकार से नियमित भुगतान की मांग

एएम नाथ। शिमला/नाहन। हिमाचल प्रदेश में सहकारी दूध समितियों के माध्यम से दूध बेचने वाले किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिलने का मुद्दा तूल पकड़ने लगा है। शिमला जिले के रामपुर उपमंडल के समीप स्थित दत्तनगर मिल्क प्लांट से जुड़े करीब 26 हजार डेयरी किसान बकाया भुगतान को लेकर परेशान हैं। वहीं सिरमौर जिले में भी किसानों ने दूध की राशि समय पर जारी न होने की शिकायत उठाई है।

नाहन में सैकड़ों डेयरी किसानों ने उठाई आवाज

सिरमौर के नाहन में हिमाचल किसान सभा के नेतृत्व में सैकड़ों डेयरी किसानों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में दूध के भुगतान में देरी के अलावा दुग्ध उत्पादकों से जुड़ी अन्य समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

किसानों ने मांग की कि सहकारी दूध संघ और संबंधित विभाग हर महीने दूध की राशि निर्धारित समय पर जारी करें, ताकि किसानों को आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

चारा, दवाइयों और घरेलू खर्च पर पड़ रहा असर

किसान सभा का कहना है कि डेयरी किसानों की नियमित आय का बड़ा हिस्सा दूध की बिक्री से आता है। भुगतान में देरी होने से किसानों के सामने पशुओं के लिए चारा खरीदने, दवाइयों का खर्च उठाने और परिवार के रोजमर्रा के खर्च पूरे करने में मुश्किलें खड़ी हो रही हैं।

किसानों का कहना है कि दूध रोजाना खरीदा जाता है, इसलिए उसका भुगतान भी नियमित और समयबद्ध होना चाहिए।

राकेश सिंघा ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

हिमाचल किसान सभा के राज्य सचिव एवं पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों को नियमित रूप से समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि किसान दिन-रात पशुपालन कर दूध उत्पादन करते हैं, लेकिन भुगतान में देरी से उनकी आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

सिंघा ने चेतावनी दी कि यदि भुगतान व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं किया गया तो किसान बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

दूध की गुणवत्ता जांच के लिए आधुनिक मशीनें लगाने की मांग

किसान सभा ने दत्तनगर समेत प्रदेश के विभिन्न मिल्क प्लांटों में दूध की गुणवत्ता जांच के लिए अत्याधुनिक उपकरण लगाने की मांग की है।

संगठन का कहना है कि आधुनिक जांच व्यवस्था से दूध की गुणवत्ता का पारदर्शी और सटीक आकलन हो सकेगा। इससे किसानों को उनकी उपज की गुणवत्ता के अनुसार उचित भुगतान सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।

सरकार से नियमित भुगतान और पारदर्शी व्यवस्था की मांग

डेयरी किसानों ने सरकार और सहकारी दूध संघ से मांग की है कि दूध का भुगतान नियमित रूप से तय समय पर किया जाए। इसके साथ ही दूध की गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और दुग्ध खरीद व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाएं।

किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान व्यवस्था पटरी पर नहीं आई तो आंदोलन को प्रदेश स्तर तक ले जाया जा सकता है।

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